Breaking News
recent

शहर की सड़कों पर बढ़ता गया यातायात दबाव, बिगड़े हालात तो मानी गलती

भवनेश गुप्ता/जयपुर. राजधानी की सड़कों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ता रहा, जिम्मेदार अफसर कागजी प्लान बनाते रहे। सार्वजनिक परिवहन और नॉन मोटराइज्ड वाहनों को बढ़ावा देने की जरूरत तो मानते रहे लेकिन उस पर ध्यान नहीं दे पाए। बल्कि फ्लाइओवर, रेलवे ओवरब्रिज, अण्डरपास आदि का निर्माण कराते रहे। अब यातायात-परिवहन मास्टर प्लान की रिपोर्ट में माना है कि इन वैकल्पिक रास्तों से नहीं, मोटर गाडिय़ों की संख्या घटाने से यातायात समस्या नियन्त्रित हो पाएगी। जानकारों का कहना है कि अफसरों ने गलती मानी है तो अब ध्यान रखना होगा कि उसका दोहराव न हो।

शहर के हित में ये करने ही होंगे उपाय
- सार्वजनिक परिवहन के सभी संसाधनों की संख्या आबादी के अनुपात में हो।
- शहरभर में सार्वजनिक परिवहन के संसाधनों के रूट निर्धारित हों। ऐसा एक भी मुख्य रास्ता न बचे, जहां सार्वजनिक परिवहन के संसाधन नहीं पहुंच पाएं। इसके लिए जेसीटीएसएल बस सेवा, मेट्रो, ई-रिक्शा, मिनी बस आदि सभी का समन्वय हो।
- सरकारी स्टडी रिपोर्ट में चिह्नित रूटों पर यात्रियों की संख्या और उसी आधार पर परिवहन सुविधा का आंकलन हो।
- बीआरटीएस कॉरिडोर का दायरा बढ़े। अन्यथा सीकर रोड व न्यू सांगानेर रोड पर बने कॉरिडोर का अन्य उपयोग निर्धारित हो।

पहले ये कीं गलतियां
- यातायात नियन्त्रण मण्डल से लेकर जिला कलक्टर तक हर स्तर पर बैठकों में कागजी प्लान बनते रहे।
- जिम्मेदार अधिकारी कहते तो रहे कि फ्लाइओवर, रेलवे ओवरब्रिज, अण्डरपास बनाने की बजाय सार्वजनिक परिवहन का दायरा बढ़ाना चाहिए लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया। सार्वजनिक परिवहन की आवश्यकताएं पूरी नहीं कर पाए।
- अनदेखी के चलते ही बीआरटीएस कॉरिडोर की उपयोगिता तक खत्म हो गई। शहर में अब भी 1000 बसों की जरूरत है ताकि लोगों को हर रूट पर बस मुहैया हो।
- ई-रिक्शा जैसे नॉन मोटराइज्ड वाहनों को बढ़ावा नहीं दे पाए। अभी 10 से 12 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं लेकिन आरटीओ ने इनके रूट तक तय नहीं किए हैं। इसीलिए ये बेतरतीब चल रहे हैं। किसी इलाके में लोग ई-रिक्शा का इन्तजार कर रहे हैं, किसी में इनका झुंड लगा हुआ है।

सार्वजनिक परिवहन का यों गिरा ग्राफ
वर्ष 1982 : 26 प्रतिशत
वर्ष 1996 : 24 प्रतिशत
वर्ष 2002 : 20 प्रतिशत
वर्ष 2009 : 19 प्रतिशत
वर्ष 2010 : 22 प्रतिशत
वर्ष 2018 : 14 प्रतिशत

सिटी बसों की स्थिति
उपलब्धता
- 500 बसें हैं जेसीटीएसएल की अभी
- 390 बसों का ही हो रहा संचालन
- 33 रूटों पर ही चल रहीं ये बसें
- 108 बसें हो चुकीं कंडम
जरूरत
- 1000 बसों की जरूरत
- 500 बसें पहले फेज में आ सकती हैं
- 1200 मिनी बसें संचालित हो रही हैं, इनकी संख्या बढ़े



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.