लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद
ऐतिहासिक नौचोकी पाल पर भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग द्वारा लाखों की लागत से विकसित किया उद्यान अब रख रखाव व सार संभाल के अभाव में उजडऩे लग गया है। केयर टेकर की लापरवाही के चलते मवेशी चर रहे हैं, जिन्हें भगाने वाले कोई नहीं है। यही नहीं, तूफान से गिरे पेड़-पौधों की टहनियां सात दिन बाद भी नहीं हट पाई और तारबंदी टूटने के बाद केयर टेकर की बेपरवाही के चलते मवेशियों ने उद्यान की घास चट कर दी। इस तरह पुरा उद्यान तहस-नहस हो चुका है, मगर न तो पुरातत्व महकमे द्वारा कोई ध्यान दिया जा रहा है और न ही प्रशासन गंभीर है। इस कारण नौचोकी पाल पर भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार नौचोकी पाल व उद्यान की सार संभाल के लिए भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग द्वारा एक केयर टेकर नियुक्त है। उद्यान विकसित कर सुरक्षा के लिए तारबंदी भी की, मगर नियमित रखरखाव को लेकर केयर टेकर द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। 16 अपे्रल को आए तूफान में कुछ पेड़ों की टहनियां टूट कर उद्यान में गिर गई, तो कुछ पेड़ ही गिर पड़े। इस कारण कुछ जगह से तारबंदी भी टूट गई, जिसकी वजह से मवेशी उद्यान में घुसकर हरी घास को चट कर रहे हैं। सात दिन से कई मवेशी उद्यान में घास चट कर आराम कर रहे हैं, मगर उन्हें उद्यान से बाहर निकालने वाला कोई नहीं है।
सिंचाई नहीं, सूख रही घास
उद्यान के संरक्षण, संवद्र्धन के लिए पर्याप्त पानी व पाइप लाइन होने के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा उद्यान की समुचित तरीके से सिंचाई नहीं की जा रही है। इस वजह से उद्यान में कई जगह से घास सूख चुकी है, जिससे उद्यान की हरितिमा प्रभावित हो रही है। उद्यान उजडऩे से पर्यटक भी मुंह मोडऩे लग गए हैं।
झूलों का रखरखाव नहीं
उद्यान में ओपन जिम के संसाधनों का भी नगरपरिषद के अधिकृत ठेकेदार द्वारा रखरखाव नहीं किया जा रहा है। इस कारण कुछ संसाधन व झूले भी खराब हो रहे हैं, मगर उनका संरक्षण नहीं हो पा रहा है।
सफाई नगरपरिषद ने करवाई
नौचोकी पाल की सीढिय़ों पर व्याप्त गन्दगी को लेकर सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए आने वाले शहरवासियों की मांग पर नगरपरिषद द्वारा सफाईकर्मी लगाकर सीढिय़ों की सफाई करवाई गई।
करेंगे आवश्यक कार्रवाई
देखरेख के लिए केयर टेकर है। तारबंदी जल्द से जल्द ठीक करवाई जाएगी। घास मवेशी द्वारा चट कर दी गई है, तो गंभीर बात है। इसके लिए आवश्यक कार्य के लिए अभी मैं बात करता हूं।
डॉ. वीएस बड़ीगर, क्षेत्रीय अधिकारी भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग जोधपुर





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