भीनमाल. नकली घी के कारोबार से भीनमाल का जुड़ाव रहा है और यहां नकली घी बनाने की फैक्ट्री तक पकड़ी जा चुकी है, लेकिन उसके बाद भी विभाग की ओर से अनदेखी समझ से परे है। विभाग की ओर से सेंपलिंग में ढिलाई बरती जा रही है।
दूसरी तरफ सावों की सीजन में मारवाड़ क्षेत्र में घी की बड़ी खपत के चलते नकली का कारोबार फल फूलता रहा है। पिछले दो साल में विभाग ने शहर में एक बार भी घी के सैंपल नहीं लिए है। कार्रवाई का डर नहीं होने से नकली घी का कारोबार करने वाले लोगों के हौंसले बढ़े हुए है। हैरानी की बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अप्रेल व मई माह में सावों में उपयोग होने वाले घी व खाद्य सामग्री के सैंपल नहीं भरे जा रहे है। विभाग महज दीपावली पर्व पर मिठाई के सैंपल लेकर कार्रवाई के नाम पर इतिश्री कर देता है। सावों की सीजन में डिमाण्ड बढऩे के साथ ही नकली घी के कारोबार की संभावना अधिक रहती है। नकली घी के कारोबार की वजह से इस कारोबार में लिप्त लोगों की बल्ले-बल्लेे हो रही है। लोग नकली घी बाजार में उतार कर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है। क्षेत्रभर में सावों के आयोजन में बड़ी मात्रा में घी की खपत होती हैै, ऐसे में इन दिनों घी माफियाओं की बल्ले-बल्ले हो रही है। दरअसल, शहर में दो बार नकली घी भी बरामद हो चुका है। 20 मई 2014 को शहर के प्रताप कॉलोनी एक मकान से स्वास्थ्य विभाग व पुलिस ने करीब 1200 किलो नकली घी जब्त किया गया था। इसके अलावा विभिन्न ब्रांड के एक व 15 किलो पैकिंग के विभिन्न ब्राण्ड पैकिंग भी जब्त किया था। इसके अलावा 2011 में शहर के जसवंतपुरा रोड से भी एक कारखाने से करीब 100 किलो नकली घी जब्त हो चुका है। शहर में कारोबारी अभी भी भोलेभाले लोगों को नकली घी आसानी से बेच देते है।
घी में सैंपल भरने में पिछड़ा विभाग
शहर में सावों के चलते बड़ी मात्रा में घी की खपत होती है। शादी-विवाह के आयोजन के दौरान लोग पहले ही बाजार में दुकानों पर घी के ऑर्डर दे रखते है। बड़ी मात्रा में घी की खपत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग दुकानों पर घी के सैंपल लेना भी मुनासिब नहीं समझता है। दो साल पूर्व स्वास्थ्य विभाग ने दीपावली पर घी के सैंपल भरे थे, लेकिन उसके बाद एक बार भी घी के सैंपल नहीं भरने से नकली घी के कारोबारियों की बल्ले-बल्ले हो रही है।
कई बीमारियों के जकडऩे की आशंका
मिलावटी व नकली घी के सेवन से कई बीमारियां हो सकती है। खासकर गर्भवती महिलाओं व बच्चों के सेवन से कुपोषण से ग्रसित हो सकते है। इसके अलावा नकली घी के सेवन से डायरिया व बीपी बढऩा, मिलावटी घी में क्रोमियम रसायन मिला होने पर लीवर एवं पाचन तंत्र खराब होने की आशंका रहती है। चिकित्सक डॉ. एमएम जांगिड़ के मुताबिक लंबे समय तक मिलावटी का सेवन करने से दिमांग, लीवर खराब व कैंसर जैसे रोग हो सकते है।
दो साल पूर्व लिए थे सेंपल
भीनमाल में दो साल पूर्व घी के नमूने लिए थे, उसके बाद घी के नमूने नहीं ले पाए। मामले में कार्रवाई की जाएगी।
गजेन्द्र सिंघल, निरीक्षक, स्वास्थ्य विभाग-जालोर..३





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