चित्तौडग़ढ़. नारकोटिक्स विभाग ने पांच अप्रेल से शुरू हो रही अफीम की तुलाई को लेकर तामजाम पूरे कर लिए है। यहां विभाग के कार्यालय परिसर में टैंट लगाने का काम पूरा हो गया है। अफीम रखने के लिए कैनों की धुलाई की जा रही है। नारकोटिक्स विभाग ने तुलाई के लिए आने वाले अफीम काश्तकारों के लिए कूलर और पंखों की भी व्यवस्था की है। पानी की व्यवस्था के लिए वाटर कूलर लगाया गया है। सोमवार को विभाग के कार्यालयों में लम्बरदार यानी मुखियाओं की आवाजाही रही, जिन्हें किसानों से मेंडेड फार्म भरवाने सहित तुलाई को लेकर विभिन्न जानकारियां दी गई। विभाग ने तुलाई को लेकर क्षेत्रवार तिथियां भी तय कर दी है, लेकिन यह तिथियां सिर्फ मुखियाओं के जरिए किसानों को ही बताई गई है, ताकि खेत से अफीम लेकर कार्यालय तक पहुंचने के दौरान लूट जैसी कोई अप्रिय घटना न हो। विभाग के खण्ड प्रथम, द्वितीय और तृतीय में इस बार चौदह हजार से ज्यादा किसानों को पट्टे दिए गए है, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। उत्पादित अफीम मापदण्ड पर खरी नहीं उतरने को लेकर भी कई किसान पट्टे कटने की आशंका को लेकर चिन्तित है। गौरतलब है कि इस बार किसानों को ५.९ मार्फिन की पूर्व चेतावनी दी गई थी। प्रथम खण्ड में अफीम का तोल पांच से बीस अप्रेल तक, द्वितीय खण्ड में ५ से १८ अप्रेल तक व तृतीय खण्ड में ५ से २२ अप्रेल तक अफीम का तोल होगा। खण्ड प्रथम में वल्लभनगर, भदेसर व चित्तौडग़ढ तहसील क्षेत्र के किसानों को ४६९९ पट्टे , खण्ड द्वितीय में गंगरार, राशमी, डूंगला, मावली, भूपालसागर व कपासन तहसील क्षेत्र के किसानों को ४२६२ पट्टे तथा खण्ड तृतीय में निम्बाहेड़ा व बड़ीसादड़ी क्षेत्र के ५२३६ पट्टे जारी किए गए थे।
अफीम की खेती के प्रति बढ रहा है रूझान
जिले में अफीम की खेती प्रमुख व्यावसायिक फसल में शुमार है। हालाकि किसान अफीम की खरीद का भाव बढाने को लेकर कई बार मांग कर चुके हैं। अफीम की खेती के प्रति किसानों में कितना ज्यादा रूझान है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि किसान कटे हुए पट्टे बाहाल करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर यहां कलक्ट्रेट के बाहर पिछले करीब एक वर्ष से धरने पर बैठे हुए हैं।





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