- चैनराज भाटी
पाली। टोपी वाले महकमें मे इन दिनों पोपा बाई का राज है, पोपा बाई का राज का मतलब तो हर कोई समझ ही गया होगा। न कोई कहने वाला और न कोई सुनने वाला, सबके मजे हैं। जनता की परवाह किसी को नहीं। शिकायत करने वाले करते रहे, चिंता बस टोपी वाले महकमे के अपने परेशान न हो। एक-दो सलाहकार कप्तान के अगल-बगल घूमते रहते है, जो सलाहकारों ने कह दिया, वह फाइनल। इस माथापच्ची में सब काम उलटे ही हो रहे हैं। ठिकाणेदारों के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही है। दाग भी लग रहे हैं, हवा देख अब जनता जोधाणा वाले बड़े साहब की शरण में जा रही है। वहां सुनवाई होते देख अब हर कोई जोधाणा की राह ही पकड़ रहा है।
एक डिकॉय यहां भी करवा लो साहब
इन दिनों टोपी वाले महकमे में डिकॉय का चलन ठीक चल रहा है। जयपुर-जोधाणा वाले साहब अपने-अपने हिसाब से डिकॉय करवा रहे हैं। एक डिकॉय जहां कप्तान बैठे है, वहां के सबसे बड़े ठिकाणे के इलाके में भी करवा दिया जाए तो बहुत कुछ सामने आ जाएगा। शाम को बेट-बॉल के खेल से चांदी, रात में बजरी से चांदी, दिन में हवाला की हवा। अब इन पर तो कैसे डंडा चलाए। सबकुछ इस ठिकाणा क्षेत्र में मिल जाएगा। प्रजा परेशान, जाए कहां, जो गए, वे डांट सुनकर आते हैं। साहब हिम्मत करके एक डिकॉय यहां भी करवा लो।
साहब ने पकड़ ली अलग राह
मेहंदी नगरी के पास मेहंदी नगरी रोड का ठिकाणा भी है, यहां दो स्टार वाले साहब के ठाठ अलग ही। साहब को कुछ और नहीं सूझा तो मोटे लोगों के साथ मिलकर और ही राह पकड़ ली। अब काम चाहे गरीबों को हटाने का हो या कुछ खाली करवाने का। या रात में नदी खुदवाने का, सबकुछ कर लेते हैं। एक-दो सफेद चोलों वालों की भी शरण पकड़ रखी है, ताकि कुर्सी बच रहे। कुछ हिम्मत वालों ने कप्तान से मिल राज खोले तो साहब तिलमिला गए। साहब गए हाथ वाली पार्टी के मुखिया की शरण में। अब साहब को कौन समझाए कि आखिर काम तो जो टोपी पहनकर करते है, वहीं करना पड़ेगा। खैर, भगवान सबका भला करे।





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