ब्यावर (अजमेर).
जवाजा बीसलपुर परियोजना के तहत 150 से अधिक गांवों में पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा कर दिया गया है। इन गांवों में पाइप लाइन टेस्टिंग का काम भी कर दिया गया है। इन सभी गांवों में सप्लाई को सुचारु किए जाने के लिए डेढ़ एमएलडी पानी की आवश्यकता है।
हाल में इन गांवों के लिए आधा एमएलडी पानी ही मिल रहा है। ऐसे में सभी गांवों में नियमित रूप से सप्लाई नहीं हो पा रही है, जबकि देवाता फीडर का काम पूरा होने के साथ ही इन गांवों मे बिछाई गई पाइप लाइन की टेस्टिंग भी की जानी है। अगर पानी इतना ही मिलता रहा तो गर्मी में इस पानी की खपत तो पाइप लाइन टेस्टिंग में ही रीत जाएगा।
ऐसे में ग्रामीणों को टैंकरों या फ्लोराइड युक्त पानी पर ही आश्रित रहना होगा। जवाजा बीसलपुर परियोजना के तहत डेढ़ सौ से अधिक गांवों को पाइप लाइन डालकर टेस्टिंग का काम किया जा चुका है। देवाता फीडर तक पाइप लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। कालिंजर गांव से करीब सौ मीटर पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा हो जाता है तो ६० गांव और जुड़ जाएंगे।
इन गांवों में पाइप लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में इन गांवों में लाइन की टेस्टिंग की जाएगी। हर रोज एक गांव की लाइन की टेस्टिंग भी की जाती हैतो दो माह तो लाइन टेस्टिंग में ही निकल जाएंगे। ऐसे में जो पानी जवाजा परियोजना के लिए अब तक मिल रहा है। यह पानी तो इन लाइनों की टेस्टिंग में ही पूरा हो जाएगा।
ऐसे में करीब एक सौ अस्सी गांवों में पानी की सप्लाई में परेशानी आएगी। जबकि गर्मी के दौरान इन दो माह में ही पेयजल की सबसे अधिक किल्लत रहेगी। गौरतलब है कि जवाजा बीसलपुर परियोजना का काम पूरा किए जाने में महज तीन माह का समय शेष रहा है। ऐसे में अब काम को पूरा करने का दबाव है। इस बीच न तो पूरा पानी मिल रहा है।
न ही अब तक लाइन बिछाने में आ रही परेशानी ही दूर हो सकी है। ऐसे में यह परियोजना निर्धारित समय में पूरा नहीं हो सकेगी। गौरतलब है कि बीसलपुर परियोजना के तहत ब्यावर से टॉडगढ़ तक बिछाई जाने वाली पाइप लाइन एवं आठ पम्पिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम अब भी कई जगह अटका हुआ है।
करीब डेढ़ सौ से अधिक गांवों में पाइप लाइन बिछाकर टेस्टिंग का काम किया जा चुक है। पानी की सप्लाई मिलने के साथ ही इन गांवों में पानी की सप्लाई सुचारु की जाएगी। देवाता पम्पिंग स्टेशन तक लाइन बिछाने का काम पूरा होते ही साठ गांव और जुड़ जाएंगे।
- आर. एल. पंवार, एईएन, जवाजा बीसलपुर परियोजना





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