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अवैध कब्जों से धुंधली हो रही सुनहरी आभा,चुनावी माहौल में बढ़ रहा अतिक्रमणों का दौर

जैसलमेर. देशी-विदेशी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र जैसलमेर शहर के चारों तरफ सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों की बाढ़ सी आई हुई है। शहर की कच्ची बस्तियों से लेकर महत्वपूर्ण सडक़ मार्गों के आसपास खाली जमीन अतिक्रमियों के निशाने पर होने के बावजूद जिम्मेदार महकमे की ओर से ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है। उधर, लोकसभा चुनाव की तैयारियों में सरकारी अमले के जुटे होने की वजह से सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले पेशेवर लोगों की मौज हो गई है। हालत यह हो गई है कि शहर की चारों दिशाओं में बड़ी तादाद अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। कहीं-कहीं तो पक्के निर्माण तक करवाए जा चुके हैं, जिन्हें आने वाले समय में हटाना प्रशासन के लिए भी आसान नहीं रह जाएगा। वैसे, अतिक्रमणों का यह खेल बिना सांठगांठ के संभव होता नहीं दिखता।
जहां नजर, वहां कब्जे
पर्यटन तथा अन्य कारणों से जैसलमेर में जमीनों के कीमती होते जाने के चलते यहां नगरपरिषद, यूआइटी और राजस्व जमीनों पर अवैध कब्जों की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती गई है। उन पर समय रहते संबंधित महकमों की तरफ से कार्रवाई नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता है। जानकारी के अनुसार गत समय में अतिक्रमणकारी वायुसेना स्थल के आसपास राणीसर कच्ची बस्ती, बबर मगरा, गफूर भ_ा, म्याजलार चौराहा और लिंक रोड के आसपास, रामगढ़ बाइपास मार्ग सहित ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र तथा उसके इर्द-गिर्द खाली जमीनों को कब्जाने में विशेष तौर पर जुटे हुए हैं। कई जगहों पर तो ये तत्व आपस में मिलकर एक साथ कब्जे करते हैं ताकि कार्रवाई के समय एकजुट होकर प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।
पॉश कॉलोनियां भी अछूती नहीं
अतिक्रमणों और अवैध कब्जों की मार से वर्षों पहले विकसित हुई शहर की आवासीय कॉलोनियां भी बच नहीं पा रही। जानकारी के अनुसार इन कॉलोनियों में कुछ ऐसे भूखंडों पर पक्के कब्जे हो चुके हैं, जिन्हें नगरपरिषद ने नीलामी के लिए चिह्नित किया हुआ है। वर्षों पहले तत्कालीन कलक्टर अम्बरीश कुमार के निर्देशन में जो एयरफोर्स चौराहा क्षेत्र पूरी तरह से कब्जामुक्त करवाया गया था, वहां वर्तमान में एक के बाद एक कई पक्के निर्माण कार्य हाो गए हैं। आवासीय कॉलोनियों में कुछ भूखंडों पर कब्जों को हटवाने की कार्रवाई की थी, कुछ अर्से बाद वहां फिर से कब्जे होने शुरू हो गए।
यूं बिकता है कब्जा
पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि जैसलमेर शहरी क्षेत्र में आई कच्ची बस्तियों में पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से जमीन पर कब्जा कर उसे आगे बेचे जाने का खेल भी खुलकर खेला गया है और इस कार्य में जुटे रसूखदारों ने लाखों रुपए के वारे-न्यारे किए हैं। ऐसे लोग खाली भूखंड पर पत्थर आदि डाल कर उस पर कब्जा कर लेते हैं, फिर उसे आगे बेच डालते हैं। ऐसा करते-करते इन लोगों ने दर्जनों भूखंडों को बेच डाला।

फैक्ट फाइल -
- 35 वार्ड जैसलमेर नगरपरिषद क्षेत्र में
- 10 से ज्यादा कच्ची बस्तियां
- 08 आवासीय कॉलोनियां विकसित

शुरू की गई है कार्रवाई
जैसलमेर शहर में वेंडिंग और नॉन वेंडिंग जोन का निर्धारण किया हुआ है। इसके आधार पर गुरुवार को हनुमान चौराहा पर कार्रवाई करवाई गई है।
-सुखराम खोखर, आयुक्त नगरपरिषद, जैसलमेर



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