चित्तौडग़ढ़. अर्पित को इंजीनियर बनने के बावजूद मन को संतुष्टि नहीं थी। हमेशा ये लगता था कि देश व समाज की सेवा के लिए सिविल सेवा से बेहतर कोई जॉब नहीं हो सकता। इसी सोच के चलते कड़ी मेहनत सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाने के लिए की। चित्तौडग़ढ़ के मधुवन निवासी २५ वर्षीय अर्पित बोहरा का सिविल सेवा में जाने का सपना उस समय पूरा हो गया जब संघ लोक सेवा आयोग की ओर से घोषित भारतीय प्रशासनिक एवं अधीनस्थ सेवा प्रतियोगी परीक्षा-२०१९ के परिणाम में उसे अखिल भारतीय स्तर पर १७८वीं रैंक मिली। पहले ही प्रयास में सफल रहे बोहरा को रैकिंग के आधार पर भारतीय राजस्व सेवा मिलने की संभावना है।
अर्पित के पिता प्रकाशचन्द्र बोहरा कृषि विभाग में सहायक लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत व माता मीना बोहरा गृहणी है। अर्पित ने निरमा यर्निवसिटी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। अर्पित ने पत्रिका को बताया कि पिता को सरकारी नौकरी करते देख उसने भी सरकारी सेवा में आने का निर्णय किया। सिविल सर्विस में आकर देश व समाज के लिए कुछ बेहतर करने की इच्छा है। उन्होंने बताया इस परीक्षा के लिए निजी कंपनी में इंजीनियर की नौकरी छोड़कर तैयारी कर रहे थे। परीक्षा में एच्छिक विषय के रूप में एन्थ्रोलॉजी (मानवशास्त्र) का चयन किया एवं इसके लिए दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर से मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। अर्पित ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व शिक्षकों को दिया। अर्पित के चयन की सूचना मिलते ही उनके परिजनों व मित्रों ने बधाईयां दी।





No comments:
Post a Comment