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किसान हुए सरकार से नाराज

भीलवाड़ा।


सरकारी खरीद कांटों पर गेहूं बेचने में किसान रुचि नहीं दिखा रहे हैं। भीलवाड़ा में समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र पर पांच दिन में एक भी किसान नहीं आया है। यही हाल गुलाबपुरा को छोड़कर जिले के अन्य खरीद केन्द्रों का है। माना जा रहा है कि समर्थन मूल्य व मंडी के भाव में खास अंतर नहीं है। इसके अलावा सरसों व चने की आवक भी बनी हुई है। गुलाबपुरा क्रय विक्रय सहकारी समिति केन्द्र के अलावा जिले में कहीं भी किसान सरकारी खरीद केन्द्र पर नहीं पहुंचे।
सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। शहर में एफसीआइ के सरकारी कांटे पर तीन दिन में एक बोरी की भी खरीद नहीं हुई। इधर, मंडी में १२ सौ क्विंटल से अधिक गेहूं की आवक हो चुकी है। शनिवार को भी लगभग चार सौ बोरी गेहूं की आई। कागजी कार्रवाई, टोकन लेने व तारीख के हिसाब से माल लाने के झंझट से बचने के लिए किसान मंडी में व्यापारियों को गेहूं को बेचने में रुचि ले रहे हैं। किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा देने के लिए जिले में 11 स्थानों पर खरीद केंद्र खोले हैं।

भाव १७५० से २०००
किसान रामा गुर्जर ने कहा कि वह एक ट्रॉली गेहूं लेकर मंडी में आया है। भाव १८२५ रुपए प्रति क्विंटल बोले गए जो लगभग सरकारी समर्थन मूल्य के बराबर ही है। मंडी में हाथों-हाथ पैसा मिल जाता है। सरकारी कांटे पर खानापूर्ति अधिक है। तारीख आने पर माल लेकर पहुंचो। फिर पैसा बैंक में आएगा।

सरसों व चने की स्थिति यही
सहकारी विभाग की ओर से भी सरकारी समर्थन मूल्य पर सरसों व चने की खरीद कर रही है। इन पांच दिनों में एक भी बोरी सरकारी खजाने में नहीं आई है। माना जा रहा है कि किसान अभी मंडी भाव देख रहा है। चने का कम उत्पादन होने से इनके दामों में तेजी की संभावना है। हालांकि जिन किसानों को पैसे की जरूरत है वे सरसों व चना मंडी में ला रहे हैं। शुक्रवार को २५० बोरी सरसों व ७०० बोरी चने की आवक हुई।



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