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चंग की थाप पर जमकर बरसे कोड़े, रंगों के ऐसा खेल आपने कभी नहीं देखा होगा

भीलवाड़ा।

मेवाड़ में 15 दिन तक होली मनाई जाती है। अलग—अलग जगहों पर अलग—अलग दिन होली खेलने की परंपरा है। शहर के बडा मंदिर इलाके में होली के ठीक 13 दिन बाद रंगतेरस के दिन जीनगर समाज द्वारा कोड़ामार होली खेली जाती है। वर्षों पुरानी इस परम्परा को जीनगर समाज ने आज भी कायम रखा है। बुधवार को भी जीनगर समाज द्वारा कोड़ामार होली खेली गई।

 

इसमें पुरुषों के रंग बरसाने की जिद का महिलाओं ने उन पर कोड़े बरसाकर जवाब दिया। ढोल की थाप और शोर में रंग से तर कोड़ों का प्रहार करतीं महिलाएं और इसे झेलते युवा, बुजुर्ग व बच्चे मस्ती में डूबे दिखे। जैसे ही कड़ाह का रंग भरा पानी मग में भरने और उसे महिलाओं पर फेंकने के लिए पुरुष आगे बढ़ते तो महिलाएं ताकत से कोड़े बरसाती। कड़ाह के पास पुरुषों के आते ही महिलाएं कोड़ों के जरिए उन्हें खदेड़ती रहीं।

 


200 सालों से चली आ रही परंपरा
गुलमंडी क्षेत्र में 200 साल से चली आ रही परंपराम रंगतेरस पर पारंपरिक कोड़ामार होली के रूप में साकार हुई। इसका पूरा रोमांच रहा। सड़क पर रंग भरे कड़ाह और आसपास खड़ी महिलाएं इस रंगीन पानी में भीगे कोड़े युवाओं पर बरसा रही थीं। युवा इन कोड़े की मार खाते हुए भी मुस्कुरा रहे थे। इस रोमांच को देखने छतों पर भी भीड़ जमा थी।


प्रदेशभर के हिस्सों के लोग लेते हैं भाग
शहर के कोने-कोने से समाज अपने-अपने काम छोड़ कर भी भाग लेते हैं तो नव विवाहित जोड़े खासकर अधिक संख्या में हिस्सा लेते हैं। कोड़ा मार होली को देखने प्रदेशभर से समाज की लोग भी आए।



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