कोटा. राज्य सरकार की ओर से किसानों की कर्ज माफी कर खूब वाहवाही लूट ली है, लेकिन सहकारी बैंकों को ऋण राशि का पुनर्भरण नहीं होने से cooperative banks की वित्तीय स्थिति डांवाडोल हो गई है। खरीफ के लिए ऋण देने में बैंकों के सामने नकदी का संकट खड़ा हो गया है। Debt collection नहीं होने से Cooperative bank घाटे में आ गए हैं। ऐसे में सरकार ने ऋण बांटने के लिए सहकारी बैंकों को फूंक-फूंक कर कदम ऋण बांटने के आदेश दिए हैं। इसके लिए ऋण बांटने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
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सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार ने की ओर से Co-operative land development banks की भी ऋण नीति जारी कर दी है। इसमें कहा कि ऋण किसान की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का आंकलन करने के बाद ही ऋण बांटा जाना चाहिए। ऋण वसूली में कोताही नहीं चलेगी।
ऋण बांटने वाले शाखा सचिवों की ही जवाबदेही तय की गई है। ऋण वसूली नहीं हुई तो उनसे वसूल की जाएगी। आदेश के तहत भूमि विकास बैंकों के सतर पर वसूली में गिरावट एवं एनपीए में वृद्धि होने के कारण इन बैंकों की आर्थिक स्थित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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हाड़ौती के चारों भूमि विकास बैंक घाटे में
विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 36 भूमि विकास बैंकों में ज्यादातर हानि में संचालित है। कोटा का भूमि विकास बैंक करीब छह करोड़ हानि में चल रहा है। बूंदी, बारां तथा झालावाड़ का भूमि विकास बैंक में करीब इतनी ही राशि के हानि में चल रहे हैं।





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