सिवाना. कस्बे के हनवंतपुरा स्थित भगवान महावीर स्वामी जिनमंदिर, दादावाड़ी प्रांगण में शनिवार को मुमुक्षु मनीषा छाजेड़ के दीक्षा ग्र्रहण करने के उपलक्ष में मांगलिक कार्यक्रम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
सुबह भगवान महावीर स्वामी जिनमंदिर प्रांगण में पंचकल्याणक पूजा-अर्चना, इसके बाद ओसवाल जैन न्याति भवन जैन सकल संघ की सामूहिक नवकारसी का आयोजन हुआ। दोपहर दो बजे कुशल आराधना भवन में गांव सांझी के आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर सुमेरमल, डूंगरचंद, कांतिलाल, बाबूलाल, मुकेश कुमार, जैन यूवा मोर्चा अध्यक्ष महेश नाहटा उपस्थित थे।
सफ लता के लिए वर्तमान काल का करें सदुपयोग
सिवाना. भूत काल हमारे हाथ से निकल चुका है। भविष्य काल हमारे पास आया नहीं है। हमारे पास में है तो सिर्फ वर्तमान। उसको जो सफल कर करता है, वहीं सफल होता है। मुनि नवीन प्रज्ञ ने कस्बे के जैन स्थानक भवन में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुनि ने कहा कि हमारे जीवन की विडंबना है कि हम अधिकांश या तो भूतकाल का रोना रोते है या फिर भविष्य की कल्पनाओं में खोए रहते हैं। वर्तमान में हमें क्या करना है। इस ओर हमारा ख्याल ही नही रहता, लेकिन जो वर्तमान को सफल कर लेता है, उसका भूत व भविष्य दोनों सार्थक हो जाते हैं। वर्तमान के पाप ही भविष्य में संताप देने वाले बनते हैं। हम संताप से तो बचना चाहते है, लेकिन पाप से नहीं। सांप ज्यादा से ज्यादा एक जन्म का नुकसान कर सकता है। पाप भवोभव का नुकसान करने वाले होते हैं, फिर भी जितना डर सांप से लगता है, उतना डर पाप से नहीं लगता। मुनि जागृत ने कहा कि शरीर एवं आत्मा में ज्यादा मूल्यवान आत्मा है, लेकिेन हम शरीर को मूल्यवान मानकर उसके इर्द-गिर्द ही समूचा जीवन जीते हैं। संचालन केशरीमल चौपड़ा ने किया। निप्र





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