जैसलमेर. विश्व स्तरीय पहचान बना चुके ऐतिहासिक सोनार किले की घाटियां चिकनी होने के कारण राहगीरों व वाहन चालकों के लिए मुसीबत बनी हुई है। किले की घाटी व सीवरेज की नालियों पर लगे पत्थरों पर आवाजाही करने वाले राहगीरों व वाहन चालकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। गौरतबल है कि वार्ड संख्या : 4 के तौर पर पहचाने जाने वाले सोनार किले में सैकड़ों लोग निवास करते हैं, वहीं दुर्ग में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर, जैन मंदिर, रामदेव मंदिर सहित कई मंदिर होने के कारण बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों की यहां से आवाजाही दिन भर बनी रहती है। सोनार किले की घाटियों पर लंबी समय से टंचाई नहीं होनेसे पत्थर चिकने हो रहे हैं। ऐसे में यहां से पैदल या वाहन पर आवाजाही करने वाले लोगों को सावधानी बरतनी पड़ रही है। दुर्गवासी बताते हैं कि लंबे समय से किले की घाटियों के पत्थर चिकने होने के कारण वाहन फिसलने या लोगों के गिरकर घायल होने की घटनाएं सामने आ रही है, लेकिन अभी तक जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी है।
सबसे ज्यादा परेशानी यहां
सोनार किले की सूरज प्रोल व गणेश प्रोल पर घुमावदार रास्ता होने के कारण आवाजाही करने वाले लोगों को यहां सर्वाधिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व में दुर्ग की घाटी के पत्थरों को टंचवाने का काम में जैसी सक्रियता व गंभीरता देखने को मिल रही थी, वैसी लंबे समय से देखने को नहीं मिल रही है। दुर्गवासियों की मानें तो औपचारिक तौर पर यह कार्य करवाया जा रहा है, जिससे कुछ दिन में फिर से घाटियां चिकनी हो जाती है। कई बार पर्यटक भी घाटियों से फिसलकर घायल हो जाते हैं और दुपहियावाहन चालक भी गिरकर घायल हो जाते हैं। घाटियों पर ही पानी की निकासी के लिए बने नाले पर लगी दाबडियों पर गुजरने वाले राहगीर सबसे ज्यादा फिसलकर घायल हो रहे हैं।





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