बीकानेर. 'गवरल ए तू पाछी आव-पाछी आवÓ, 'रो मति गवरल हरियाळा ईसरÓ सरीखे गीत गाते हुए सोमवार को घरों से निकली बालिकाओं के चेहरों पर उत्साह था, लेकिन मन में उदासी। गणगौर को विदा करने आई बालिकाएं रुंधे गले से गणगौर से वापस जल्दी आने का आग्रह भरे गीत भी गा रही थी। मौका था एक पखवाड़े तक पूजन करने के बाद सोमवार को गणगौर विसर्जन करने का। इस दौरान जस्सूसर गेट, चौतीना कुआं, नया कुआं, भीनासर, नत्थूसर बास सहित विभिन्न स्थानों पर गणगौर का मेला भरा। बड़ी संख्या में मंगलवार को भी बालिकाएं गणगौर को विदाई देगी और मेला भी भरेगा। घरों में होली के बाद धुलंडी से बालिकाओं ने गणगौर पूजन शुरू किया था, जिसकी पूर्णाहुति सोमवार को हुई। गणगौर स्वरूप मिट्टी के पाळसियों का विसर्जन अलग-अलग क्षेत्रों में किया गया।
गणगौर भोळावन की रस्म निभाई
जस्सूसर गेट क्षेत्र में स्थित मोहता कुएं पर बालिकाओं ने पूजन सामग्री सहित पाळसियों का विसर्जन किया। इसी तरह चौतीने कुएं पर मेला भरा। गण्गाौर भोळावन की रस्म अदा की गई। इस दौरान इन क्षेत्रों में चाट-पकौड़ी की अस्थायी दुकानों पर महिलाओं और बालिकाओं की भीड़ रही। वहीं बच्चों ने खाने-पीने के साथ ही झूलों का लुत्फ उठाया। सजी-संवरी बालिकाएं बैंड बाजों के साथ गणगौर को विदाई देने पहुंची। मेला स्थलों पर पुलिस प्रशासन चाक-चौबंद रहा।
जूनागढ़ से निकली गणगौर की शाही सवारी
परम्परा के अनुसार बीकानेर गणगौर समारोह समिति की ओर से सोमवार को शाम छह बजे जूनागढ़ से गणगौर की शाही सवारी निकाली गई। शाही लवाजमें के साथ निकली गणगौर सवारी जूनागढ़ से रवाना होकर चौतीनें कुएं पर पहुंची, जहां पर गणगौर की खोळ भराई व पानी पिलाने की रस्म को निभाया गया। मंगलवार को भी शाही सवारी निकलेगी।





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