Breaking News
recent

कभी किया करते थे पूजन, आज उनकी पवित्रता की खत्म हुई पहचान

नैनवां. कस्बेवासी पूर्वजों की दी सौगात को संभाल नहीं पाए। कई पीढिय़ों तक काम में लेने के लिए जो धरोहर सौंप कर गए थे, हमने उस धरोहर को शौचालय बना डाला। कोई पारिवारिक या सार्वजनिक समारोह हुआ करता था तो ढोल-नगाड़ों के साथ घाटों को पूजने आते थे, आज उनकी पवित्रता की पहचान खत्म कर घाटों पर शौच कर रहे हंै। कस्बे के बुजुर्गो के अनुसार 15वीं शताब्दी में जब किलेदार नाहर खानसिंह ने नैनवां को टाउन प्लानर के हिसाब से बसाया था तो कस्बे के दोनों ओर निकलने वाले खाळों के पानी को सुरक्षा के लिए कस्बे के चारों और बनाए विशालकाय परकोटें को ही तालाबों का रूप दिया था। दोनों तालाबों का नामकरण किया गया।उत्तर में कनकसागर व पश्चिम में तालाब का नाम नवलसागर रखा गया। तालाबों पर नहाने की सुविधा के लिए आवश्यकतानुसार पुरुष-महिलाओं के लिए अलग-अलग कई घाटों का निर्माण भी कराया था। दो दशक से तालाब खाली रहते आने से अब लोगों ने घाटों का महत्व समझना छोड़ दिया।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.