दौसा. संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर Baba Saheb Dr. Bheemrao Ambedkar ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उनकी आड़ लेकर सामाजिक रार पैदा की जाएगी, लेकिन एक साल पहले राजनीतिक व सामाजिक प्रतिष्ठा की महत्वाकांक्षा ने समाजों को आपस में लड़ाने के साथ महापुरुष की प्रतिमा को भी विवादित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। हालांकि वर्तमान में वहां हालात सामान्य हैं।
सामाजिक ताने-बाने को बिगाडऩे का यह मामला दौसा जिले के लालसोट उपखण्ड स्थित मण्डावरी कस्बे में चला था। जहां एक धार्मिक स्थल पर बनाई गई दीवार ने समाजों के बीच खटास पैदा कर दी थी। यूं तो यह एक मामूली दीवार का मुद्दा था, लेकिन सामाजिक रूप से राजनीतिक तत्वों ने इसको हवा देकर बड़ा मामला बना दिया था। विवाद बढ़ता देख प्रशासन व नेताओं ने दखल दी, लेकिन बात नहीं बनी थी। खास बात यह है कि फिर अपने आप ही समय के साथ सब सामान्य हो गया। विधानसभा चुनाव के बाद तो वहां से पुलिस गार्ड भी हटा ली गई।
दरअसल मंडावरी कस्बे मेंं 23 मार्च 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बैरवा समाज के संत बालीनाथ के नवनिर्मित मंदिर का लोकार्पण किया था। मंदिर निर्माण के दौरान बालीनाथ विकास समिति ने मंदिर परिसर से अन्य समाजों के मोक्षधाम के लिए जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया था, क्योंकि रास्ता मंदिर की भूमि में था। इससे कई दिनों तक विवाद हो गया और मुख्यमंत्री के दौरे पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। लोगों का कहना था कि यह रास्ता बंद कर देने से उन्हें दूर चक्कर लगाकर श्मशान पहुंचना पड़ेगा।
22 मार्च को राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीना ने मंडावरी पहुंचकर रास्ते को खुलवाकर विवाद शांत कराया। 6 अप्रेल की रात रास्ते पर फिर से दीवार बनने पर विवाद खड़ा हो गया। 7 अप्रेल को कई समाजों के लोगों ने दीवार के विरोध में लालसोट-गंगापुर हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा तैनात कर दी। मूर्ति स्थल पर गार्ड तैनात रही। विधानसभा चुनाव के दौरान हटा ली गई। फिलहाल मौके पर बिल्कुल शांति है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस समय राजनीतिक साजिश के तहत यह हंगामा हुआ था। मनमुटाव जैसी कोई बात गांव के लोगों में नहीं है।
रातों-रात लगी थी दीवार
मण्डावरी में महर्षि बालीनाथ मंदिर परिसर की चारदीवारी पर बने श्मशान के रास्ते को बंद करने के लिए रातों-रात दीवार खींच दी गई थी। दीवार खींचकर डॉ. भीमराव अम्बेडकर Baba Saheb Dr. Bheemrao Ambedkar की मूर्ति किसने स्थापित की थी, इस सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला है। मंदिर के मुख्य भवन के लगते ही एकतरफ मीना समाज का तो दूसरी तरफ रैगर समाज का श्मशान घाट है। सामने नाथ समाज का मोक्षधाम है।
मंदिर परिसर में मिले लोगों ने बताया कि सालों से मोक्षधाम को जाने वाले रास्ते को बंद करने से क्षेत्र में अशांति हो गई थी। 7 अप्रेल को सुबह जब लोग नींद से जागे तो बाहर से मंदिर का दरवाजा बंद था। रात को किसी ने दीवार बनाकर रास्ता बंद कर दिया और अम्बेडकर की प्रतिमा लगा दी थी।





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