कोटा। लोकसभा आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी मुक्तानंद अग्रवाल बताया कि जिले में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं त्रुटि रहित चुनाव के लिए जिला प्रशासन द्वारा सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। चुनाव ड्यूटी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ऐसे कार्मिक जो मतदान के लिए जाने वाले दल से बीमारी, परिजनों का विवाह आदि का बहाना बनाकर अनुपस्थित रहे हैं, उन्हें निलंबित किए जाएगा।।
23 हजार 759 दिव्यांग मतदाता
संसदीय क्षेत्र में 19 लाख 31 हजार 485 कुल मतदाता है। 23 हजार 759 दिव्यांग मतदाता है। संसदीय क्षेत्र में 827 शहरी क्षेत्र में तथा 1224 मतदान केन्द्र है। संसदीय क्षेत्र में 8 हजार 992 मतदान कर्मी, 214 सेक्टर मजिस्टे्रट मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराएंगे।सभी मतदान केन्द्रों पर छाया, पानी एवं अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान का समय प्रात 7 बजे से सायं 6 बजे तक रखा है।
छह मिनट से भी कम समय में रेस्पांस करेगी पुलिस
मतदान के समय मतदान केन्द्रों पर पुलिस बल तैनात रहने के अलावा 61 मोबाइल वैन तैनात रहेंगी। ये सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचेंगी। इसके अलावा आईजी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, वृत्त उपाधीक्षक और वृत्त निरीक्षक के स्तर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। पुलिस महानिदेशक के कोटे का अतिरिक्त सुरक्षा बल भी कोटा में ही तैनात रहेगा। शहर पुलिस अधीक्षक दीपक भार्गव ने बताया कि हमारा यह प्रयास रहेगा किसी भी जगह से सूचना मिलने पर पुलिस छह मिनट से भी कम समय में रेस्पांस करें। पुलिस नियंत्रण कक्ष और अन्य किसी भी माध्यम से सूचना मिलने पर तत्काल भी पुलिस मौके पर पहुंचेगी। तैयारियां इस तरह से की गई है कि किसी तरह की बाधा नहीं आए।
फैक्ट
358 संवेदशील हैें कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में
140 मतदान केन्द्रों की कास्टिंग होगी
103 केन्द्रों वीडियोग्राफी होगी
229 केन्द्रों पर माइक्रो ऑब्जर्वर
26 एरिया मजिस्ट्रेट तैनात
148 सेक्टर मजिस्ट्रेट
राजनीतिक समीकरण
कोटा-बूंदी संसदी क्षेत्र से कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं, यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला है। भाजपा ने मौजूदा सांसद ओम बिरला पर ही फिर दावं खेला है, वहीं कांग्रेस ने पूर्व सांसद और विधायक रामनारायण मीणा को प्रत्याशी बनाया है। दोनों में राजनीति के अनुभवी नेता है। ऐसे में मुकाबला रोचक हैं। विधानसभा चुनाव में लोकसभा की 8 सीटों में से पांच सीटों पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा राष्ट्रीयवाद और मोदी के नाम पर वोट मांग रही है तो कांग्रेस न्याय योजना के नाम पर वोट मांग रही है। प्रचार प्रसार का दौर थमने के बाद अब मोबाइल से मतदाताओं को संपर्क करने का दौर चल रहा है।
यूथ और बूथ मैनेजमेंट के गणित में सियासी दल
सियासी दलों का पूरा फोकस युवा और महिला वोट पर है। रणनीतिकारों का मानना है युवा पीढ़ी के सहयोग के बिना चुनावी समर आसान नहीं है। इसलिए ऐसे में राजनीतिक दलों ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को पार्टी से जोडऩे की रणनीति पर खूब काम किया।
कांग्रेस की प्लानिंग भी यूथ और बूथ
कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में यूथ को पार्टी से जोडऩे के लिए खूब काम किया। मेरा बूथ, मेरा गौरव जैसे कार्यक्रम चलाए। अब विधानसभा चुनाव में बनाए गए कार्यकर्ताओं के अलावा सोशल मीडिया के जरिए यूथ को जोडऩे की टीम गठित की गई थी। इसके साथ ही महिला वोट बैंक को भी रिझाने के भी प्रयास किए गए।
बूथ पर फोकस इसलिए
भाजपा हो कांग्रेस इन दोनों राजनीतिक दलों की बूथ कमेटियों में पांच से 15-20 सदस्य शामिल हैं। ये सीधे आम जन के संपर्क में बने रहते हैं। यही कमेटियां हैं, जो सभाओं में भीड़ का हिस्सा भी होती हैं और नारेबाजी से लेकर झंडे भी लहराते हैं। पान की दुकान से लेकर नुक्डड़ व आयोजनों में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का काम भी इन्हीं का होता है। इसलिए दलों ने सियासी सफ र को आसान बनाने के लिए बूथ कमेटियों पर फ ोकस बढ़ा दिया।
महिला और युवा वोट बड़ी ताकत
कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र में पहली बार के मतदाताओं की बात करें तो 18 से 19 साल तक की आयु के मतदाताओं की संख्या 56 हजार 842 है। इनमें से 40 हजार 186 मतदाता केवल कोटा जिले में हैं। महिला मतदाताओं की संख्या 9 लाख 33 हजार 720 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 9 लाख 97 हजार 740 है। संसदीय क्षेत्र में कुल 19 लाख 31 हजार 460 मतदाता हैं। विधानसभा चुनाव के बाद नई सूची के अनुसार कोटा-बूंदी लोकसभा के कोटा जिले की छह विधानसभा सीटों के मतदाताओं की संख्या 13 लाख 79 हजार 58 हो गई है। विधानसभा चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 13 लाख 55 हजार 946 थी। जिले में 22 हजार 25 मतदाताओं का नाम कट गया और इस ज्यादा नए मतदाताओं का नाम जुड़ा है। इस तरह कोटा जिले में तुलनात्मक रूप से 23 हजार 112 हजार मतदाता जुड़े हैं। कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र की 8 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 61 हजार 32 नए मतदाता जुड़े हैं। इनमें काटे गए और जोड़े गए नामों की तुलना करें तो करीब 36 हजार 663 मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है।
इन दिग्गजों की साख दांव पर
2014 के मुकाबले इस बार हाड़ौती में चुनाव बेहद ही दिलचस्प रहने वाला है। पूर्व मुख्यमंत्री, दो मौजूदा मंत्री से लेकर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष तक की सांख दांव पर है।
वसुंधरा राजे
आपको बता दें झालावाड़ बारां सीट से पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह चुनाव मैदान में हैं। यहां भाजपा की हार-जीत का गणित इन्हीं के इर्द-गिर्द घुमता है। 1989 में वसुंधरा राजे ने अपना पहला चुनाव यहीं से लड़ा था। इसके बाद भाजपा कभी इस सीट से नहीं हारी है। वसुंधरा 4 तो दुष्यंत 3 बार यहां से सांसद रहे हैं। मौजूदा चुनावों में भी वसुंधरा राजे पर ही दुष्यंत को जिताने की जिम्मेदारी है।
शांति धारीवाल
गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री और हाड़ौती में कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल यूं तो चुनावी मैदान में नहीं है, लेकिन यहां से कांग्रेस प्रत्याशी की हार-जीत धारीवाल की राजनीति को जरूर प्रभावित करेगी। भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधो पर है। बूंदी में राहुल की जनसभा के बाद धारीवाल ने कोटा में भी कांग्रेस अध्यक्ष की सभा करवाई थी। धारीवाल, रामनारायण मीणा के समर्थन में बूथ सम्मेलन और रोड शो भी कर चुके हैं।
प्रमोद जैन भाया
पिछले दो चुनावों की तरह इस बार झालावाड़-बारां संसदीय सीट से राजे परिवार के सामने भाया सीधे मुकाबले में नहीं है लेकिन यहां कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद शर्मा से कई अधिक प्रमोद जैन भाया की प्रतिष्ठा दांव पर है। कैबिनेट मंत्री प्रमोद जैन भाया पिछले चुनाव में दुष्यंत सिंह के सामने चुनावी मैदान में थे लेकिन इस बार उन्हें प्रमोद शर्मा को जिताने की जिम्मेदारी दी गई है। चूंकि बारां में भाया का प्रभाव है और प्रमोद शर्मा झालावाड़ से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में दोनों सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन हार-जीत का गणित तय करेगा।
ओम बिरला
कोटा-बूंदी संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी ओम बिरला के सामने पूर्व सांसद और पीपल्दा विधायक रामनारायण मीणा की चुनौती है। किसी बड़े नेता कि सभा नहीं होने के बावजूद वे जीत के लिए आश्वस्त है। भाजपा में चुनावी रणनीति बनाने में माहिर बिरला के लिए ये चुनाव पहले की तरह आसान नहीं है, लेकिन पार्टी के कुछ पूर्व विधायकों के विरोध के बावजूद भाजपा ने बिरला पर ही दांव खेला है।





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