- पाली. मताधिकार का उपयोग करना हो या लोकतंत्र को मजबूती देने के प्रयास, नारी शक्ति ने हमेशा अपनी भूमिका बढ़चढ़ कर निभाई है। यही कारण है कि कई क्षेत्रों में महिलाएं मतदान करन में पुरुष मतदाताओं से आगे रहती है। लेकिन महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मसले पर राजनीतिक दल पूरे मौन रहे हैं। संसदीय क्षेत्र पाली के इतिहास पर गौर करें तो 68 साल के लोकतांत्रित इतिहास में अब तक सिर्फ पांच महिलाएं ही सियासी रण में उतरीं है। इनमें से भी संसद में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर किसी को नहीं मिल पाया।
प्रमुख पार्टियों ने दिया एक-एक अवसर
ऐसा भी नहीं है कि राजनीतिक दलों में योग्य महिलाओं की कमी है। फिर भी राजनीतिक दल महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने से अब तक बचते रहे हैं। पाली लोकसभा सीट से प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा व कांग्रेस ने अब तक एक-एक बाद महिला प्रत्याशी को मौका दिया है।
कब-कब उतरीं मैदान में
रानीदेवी भार्गव
-1951 के पहले आमचुनाव में सिरोही-पाली लोकसभा सीट से बीजेएस ने रानीदेवी भार्गव को अपना प्रत्याशी बनाया। भार्गव 7.33 प्रतिशत मत हासिल करने में सफल रहीं थी। पाली सीट से पहली बार चुनाव लडऩे का सौभाग्य रानीदेवी को ही मिला है।
पुष्पा जैन
रानीदेवी के 33 साल बाद भारतीय जनता पार्टी ने पुष्पा जैन को 1984 के आम चुनावों में मैदान में उतारा। इस चुनाव में कांगे्रस के मूलचंद डागा विजयी हुए थे। दूसरे स्थान पर रही जैन 35.88 प्रतिशत मत हासिल करने में सफल रहीं थी। बाद में जैन को पाली विधानसभा से प्रतिनिधित्व करने का अवसर अवश्य मिला था।
जैन खूजा संपत
वर्ष 1996 के चुनाव में जैन खूजा संपत ने एसएचएस पार्टी से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें महज 0.61 प्रतिशत मतों से ही संतोष करना था।
शशिकला
1998 के आम चुनावों में एएसपी ने शशिकला को मैदान में उतारा। शशिकला ने 0.47 प्रतिशत हासिल किए थे। इस संसदीय सीट से चुनाव लडऩे वाली यह चौथी महिला थीं।
मुन्नीदेवी गोदारा
2014 के चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ की बेटी मुन्नीदेवी गोदारा को प्रत्याशी बनाया। मुन्नीदेवी 28.50 मत हासिल करने में अवश्य सफल रहीं थी, लेकिन मोदी लहर में वह जीत नहीं पाई।





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