अजमेर.
जवाहर लाल नेहरू अस्पताल की आपातकालीन इकाई में व्यवस्थाएं सुधरी जरूरी हैं मगर अभी भी ट्रॉली मैन की कमी खल रही है। हालात यह है कि इलाज करवाने आने वाले मरीज के परिजन को ट्रॉली एवं व्हील चेयर खींचनी पड़ती है।
अस्पताल में सडक़ दुर्घटना में घायल गंभीर मरीजों का इलाज करवाने के लिए आपातकालीन इकाई में प्रवेश करने के साथ ही परिजन पर दोहरा काम आ पड़ता है। पहला तो ट्रॉली खींचकर लाना और दूसरा इलाज करवाना। खासकर ओपीडी समय के बाद इवनिंग ड्यूटी के समय ऐसे हालात बनते हैं जब प्लास्टर करवाने व इलाज के बाद मरीज को गाड़ी में बैठाना होता है तो परिजन खुल को ही ट्रॉली खींचनी पड़ती है।
ट्रॉली मैन कम
इसकी वजह यह है कि इस समय में एक या दो ट्रॉली मैन होते हैं वे भी अन्य मरीजों को किसी को एक्स-रे, सीटी स्कैन की जांच के लिए ले जाना पड़ता है तो कभी मरीजों को वार्डों में शिफ्ट करना पड़ता है। ऐसे में नए आने वाले मरीजों के परिजन या तो ट्रॉली मैन का इंतजार करते हैं या फिर परिजन ही ट्रॉली खींचते हैं। बुधवार को भी दोपहर एक महिला के पैर में प्लास्टर बंधवाने व इलाज के बाद गाड़ी में बैठाने के लिए परिजन युवक ही ट्रॉली लेकर बाहर आया।





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