आबूरोड. स्वायत्त शासन विभाग ने नगरीय निकाय क्षेत्र में बहुमंजिला भवनों से फायर शुल्क और फायर सेस वसूल करने तथा अग्निश्मन के बारे में नए सिरे से दिशा निर्देश जारी किए हैं। अब बहुमंजिला इमारतों में आपदा प्रबंधन के लिए हर साल जांच और मॉकड्रिल करना अनिवार्य कर दिया है। यह निकाय के अग्निशमन अधिकारी की मौजूदगी में होगी। अग्निशमन सेवा के लिए शुल्क तय कर दिए गए हैं। इसका समस्त खर्च भी संबंधित विकासकर्ता व सोसायटी को वहन करना होगा। पिछले दिनों अग्निमशन अनुभाग की ओर से शहर में निर्मित बहुमंजिला भवनों की फायर सेफ्टी ऑडिट की थी, इसमें शहर के कई बहुमंजिला भवन अग्निमशन की दृष्टि से सुरक्षित नहीं माने गए थे। कई खामियां सामने आई थी। स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं संयुक्त सचिव पवन अरोड़ा की ओर से फायर शुल्क एवं फायर सेस वसूली के संबंध में संशोधित आदेश जारी किए गए है। पूर्व के आदेशों में आंशिक बदलाव किया गया है। अब 15 मीटर से अधिक ऊंचाई के बहुमंजिला भवनों के प्रस्तावितक कुल गणना योग्य निर्मित क्षेत्र पर 50 रुपए वर्ग मीटर की दर से अग्निशमन शुल्क देय होगा। यह राशि आवेदक की ओर से निगम के अग्निशमन अनुभाग में जमा करवानी होगी। निर्माण अनुज्ञा देने वाली प्राधिकरण या न्यास में जमा राशि की रसीद निगम में पेश करनी होगी।
मॉकड्रिल होगा
प्रति वर्ष अग्निमशन सुविधाओं की जांच व मॉकड्रिल फायर एक्सपर्ट से विकासकर्ता के स्तर पर ही करवाई जाएगी। जिसका व्यय विकासकर्ता, रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के द्वारा वहन किया जाएगा। अभी मल्टीस्टोरी भवन निर्माता सालाना मॉकड्रिल भी नहीं करते हैं। आपदा प्रबंधन को परखने के लिए जिला प्रशासन अपने स्तर पर ही मॉलड्रिल करता है।
व्यय के लिए भी निर्देश जारी होंगे
फायर शुल्क और फायर सेस से वसूल की जानी वाली राशि के व्यय के संबंध में कार्य योजना तैयार करने के लिए नगरीय निकाय स्तर पर समिति का गठन किया जाएगा। राज्य सरकार की ओर से इस राशि का उपयोग करने के लिए पृथक से निर्देशा निगम को दिए जाएंगे।





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