जयपुर। कांग्रेस में टिकट बंटवारे के साथ ही असंतोष के सुर उभरने के साथ ही नाराजगी बढ़ती जा रही है। कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी कहीं लोकसभा चुनाव ( Lok Sabha Election 2019 )में भारी न पड़ जाए, इसके लिए नाराज नेताओं को मनाने के लिए डैमेज कंट्रोल किया जा रहा है। दरअसल तीन लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां टिकट बंटवारे के बाद गुटबाजी और नाराजगी देखी जा रही है। जयपुर, अजमेर और धौलपुर करौली में इसका असर देखा जा रहा है। हैरत की बात तो ये हैं कि नाराज नेता आला नेताओं की नसीहत को भी नहीं मान रहे हैं।
पार्टी सूत्रों की माने तो अजमेर में कई नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा होने से नाराज होकर निर्दलीय ही चुनाव मैदान में कूदने की तैयारी कर ली है। वहीं अजमेर के कुछ नेताओं ने कल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
बताया जाता है कि नेताओं की नाराजगी इस बातको लेकर है कि अजमेर से घोषित हुए कांग्रेस उम्मीदवार रिजु झुंझुनवाला कभी भी कांग्रेस में सक्रिय नहीं रहे और न ही वे आज तक कांग्रेस के मेंबर है। इसके बावजूद पार्टी ने स्थानीय और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर एक उद्योगपति को टिकट थमा दिया।
जयपुर में लंच पॉलिटिक्स से भी नहीं बनी बात
वहीं जयपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल को लेकर भी अंदरखाने विरोध के सुर तेज हैं। हालांकि बड़े नेताओं के दखल के बाद भले सब साथ दिखने के दावे करते हों, लेकिन पिछले तीन दिनों से जिस प्रकार से नाराज नेताओं को मनाने के लिए बैठकों को दौर चल रहा है, उससे आला नेता भी चिंतित हैं।
ज्योति खंडेलवाल के समर्थन में बुलाई गई शहर कांग्रेस की बैठक से बैठक को बीच में ही छोड़कर चले गए थे, जबकि बैठक में प्रदेश के सह प्रभारी विवेक बंसल और जिला प्रभारी मंत्री शांति धारीवाल ( Shanti Dhariwal ) भी मौजूद थे। इसके बाद नाराज नेताओं को मनाने के लिए एक होटल में लंच पॉलिटिक्स का भी आयोजन किया गया वहां भी विधायक अमीन कागजी और महेश जोशी ने लंच पॉलिटिक्स से दूरी बनाई रखी। ऐसे में साफ है कि नेताओं की नाराजगी कम नहीं हुई है।
धौलपुर-करौली पर बवाल
वहीं धौलपुर-करौली के कांग्रेस प्रत्याशी को लेकर तो पूरे एक समाज ने ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मामले लेकर कांग्रेस विधायक और धौलपुर-करौली के पूर्व सांसद खिलाड़ी बैरवा ने तो सीएम से मुलाकात कर विधायक पद से इस्तीफे की भी पेशकश कर दी। अब बताया जा रहा है कि कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए 10 अप्रेल को बैरवा समाज एक बड़ी बैठक करने जा रहा है, जिसमें कई मुद्दों फैसला लिया जा सकता है।
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