सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से मुकुंदरा शिफ्टिंग की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू हो गई है। पूर्व में विभाग की मंशा सरिस्का में बाघ शिफ्ट करने के बाद मुकुंदरा में बाघिन भेजने की थी। लेकिन अब तक बार फिर बाघ से पहले बाघिन को शिफ्ट करने की कवायद शुरू कर दी गई है। विभाग की ओर से फिलहाल इसके लिए लाइटनिंग(टी-83) व टी-99 का चयन कियागया है।बाघिन लाइटनिंग रणथम्भौर की प्रसिद्ध बाघिन है और सालों से रणथम्भौर के आमाघाटी वन क्षेत्र में टेरेटरी बनाकर विचरण कर रही है। ऐसे में बाघिन लाइटनिंग के चयन का निर्णय समझ से परे लग रहा है। इस पर वन्यजीव प्रेमियों ने भी नाराजगी जताई है।
टी-95 के साथ है विचरण
लाइटनिंग का विचरण क्षेत्र जोन तीन के आमाघाटी वन क्षेत्र में रहता है। यहां यह बाघिन पूर्व में बाघ टी-95 के साथ विचरण करती देखीगई थी। इसके चलते कई बार बाघ टी-95 भी बाघिन के पीछे जंगल से बहार निकलकर सड़क पर आ गया था।
पहले बन चुकी है मां
बाघिन लाइटनिंग पहले भी एक बार मां बन चुकी है। गत वर्ष बाघिन ने दो शावकों को जन्म दिया था। लेकिन बाघिन बाघ के साथ होने के कारण बच्वों को अमरूदों के बगीचे में छोड़कर चली गई थी। बाघिन के पीछे बाघ्घ टी-95 भी बगीचे के पास पहुंच गया था जिसे वनकर्मियों ने दूर किया था हालांकि बाद में बाघिन के शावक ओझल हो गए जिनका आज तक कुछ पता नहीं चल सका है।
मुकुंदरा में एनक्लोजर के पास छोडेगें
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन के मुकुंदरा पहुंचने के बाद उसे वहां बने एनक्लोजर में छोड़ा जाएगा। एनक्लोजर के बहार पहले से रणथम्भौर से निकलकर रामगढ विषधारी अभयारण्य होता हुआ मुकुंदरा पहुंचा बाघ टी-98 विचरण कर रहा है।
लाइटनिंग के चयन से वन्यजीव प्रेमियों में नाराजगी
वहीं दूसरी ओर लाइटनिंग को मुकुंदरा शिफ्ट करने के फैसले की आलोचना भी शुरू हो गई है। कई वन्यजीव विशेषज्ञ व प्रेमी विभाग के इस फैंसले को गलत बता रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बाघिन मछली के बाद रणथम्भौर की सबसे प्रसिद्ध बाघिन है। बाघिन की उम्र साढ़े पांच साल है। विभाग जिस इलाके में मुकुंदरा में बाघिन को छोडऩे की बात कर रहा है वहां मौजूद बाघ टी-98 अभी महज ढाई साल का है। उसकी ब्रीडिंग पावर कम बताई जा रही है। ऐसे में बाघिन लाइटनिंग के साथ बाघ टी-98 के सैटल होने की संभावनाओं पर भी वन्यजीव प्रेमियों में संश्य है।
एनटीसीए की गाइडलाइन की होगी अवेहलना
बाघ- बाघिनों की शिफ्टिंग को लेकर नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी(एनटीसीए)की ओर से एक गाइड लाइन निर्धारित की गई है। इसके अनुसार किसी भी ऐसे बाघ- बाघिन को किसी टाइगर रिजर्व से शिफ्ट नहीं किया जाएगा जो टेरेटरी में सैटल तरीके से रह रही हो।लाइटनिंग ने लम्बे समय से आमाघाटी वन क्षेत्र में टेरेटरी बना ली है और वह अपनी टेरेटरी में सैटल भी हो चुकी है ऐसे में यदि लाइटनिंग को शिफ्ट किया जाता है तो एनटीसीए की गाइडलाइन की भी अवेहलना होगी।
सुरक्षा पर भी सवाल
मुकुंदरा में जिस एनक्लोजर के बहार बाघिन को छोड़ा जाएगा वहां पर सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। ने बताया कि विभाग की ओर से एनक्लोजर के बहार सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं है साथ ही यह क्षेत्र आबादी क्षेत्र के भी नजदीक है ऐसे में कोई अनहोनी हो सकती है। पूर्व में भी मुकुंदरा में रेलवे ट्रैक पार करते रणथम्भौर के ब्रोक न टेल टाइगर की मौत हो गई थी।
आमाघाटी पहुची थी वन विभाग की टीम
वन विभाग की ओर से लाइटनिंग व अन्य बाघिनों की लगाार ट्रेकिंग कराई जा रही है। शाम को टीम ने आमाघाटी वन क्षेत्र में लाइटनिेग को ट्रेंकुलाइज करने की योजना बनाई थी लेकिन भी सफलता नहीं मिली।
ये हो सकते हैं बेहतर विकल्प
विभाग भले ही लाइटनिंग के चयन को सही ठहरा रहा है लेकिन वन्यजीव प्रेमी इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि टेरेटरी में सैटल बाघिन को डिस्टर्ब करना ठीक नहीं होगा। वहीं लाइटनिंग के स्थान पर टी-99, टी-102,टी-105, टी-107 आदि प्रमुख है। विभाग की ओर से गत दिनों शिफ्टिंग के लिए आठ बाघिनों को चयनित किया था इनमें टी-83भी शामिल हैं।
इनका कहना है....
हमने करीब आठ बाघिने चिह्नित की थी। इसमें टी-83 भी है। गुरुवार को टी-83 की ट्रेकिें ग कर ट्रेकु्रं लाइज करने का प्रयास किया था लेकिन अभी ट्रेकुंलाइज नहीं किया है। अभी यह पक्का नहीं है कि टी-83 को ही भेंजा जाएगा। विभाग टी-99 पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- मुकेश सैनी, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।





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