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video_मुख्य मंडी की आय बढ़ी, गौण मंडियों की घटी


प्रतापगढ़
यहां प्रतापगढ़ मुख्य मंडी में जिंसों की बम्पर आवक के कारण आय बढ़ी है। वहीं जिले की गौण मंडियों की आय कम हो रही है। जबकि संभाग स्तर पर प्रतापगढ़ जिले की प्रतापगढ़ और छोटीसादड़ी की मंडियां आय में अव्वल रही है। यहां गत कई वर्ष से संभाग में सर्वाधिक आय होती आई है। इस वर्ष भी प्रतापगढ़ मंडी की आय ५ करोड़ ६७ लाख और छोटीसादड़ी मंडी की आय एक करोड़ २७ लाख रुपए की हुई है।
गौरतलब है कि कांठल का इलाका उपजाऊ है, इससे यहां प्रदेश की अन्य इलाकों की तुलना में उत्पादन भी अच्छा होता है। इससे संभाग में यहां की मंडियों में आवक भी अधिक होने से आय भी अधिक होती है। जिले में प्रतापगढ़ की मुख्य मंडी में छोटीसादड़ी, अरनोद, सालमगढ़ और धरियावद की मंडियां शामिल थी। वहीं दो वर्ष पहले छोटीसादड़ी मंडी को अलग कर दिया गया। इससे प्रतापगढ़ की मंडी की आय भी गत वर्षों की तुलना में कम हो गई। हालांकि दोनों मंडियों को मिलाकर आय अब भी संभाग में सर्वाधिक है।

यह रहा गत वर्षों का आंकड़ा
मंडी २०१७-१८ २०१८-१९
प्रतापगढ़ ४५३.०३ ४७०.१२
अरनोद ९५.२० ४०.९८
धरियावद ८५.६६ ४७.५०
सालमगढ़ २१.६८ ०९.६२
कुल ६५५.५७ ५६७.७२
(आय लाखों में मंडी सूत्रों के अनुसार)

अरनोद मंडी में ढाई करोड़ के कार्य प्रगति पर
अरनोद
अरनोद मंडी को मुख्य मंडी बनाने के बाद यहां विभिन्न कार्य प्रगति पर है। इसमें दो बड़े कवर्ड चबूतरे बनाए जा रहे है। पूरी मंडी में सीसी का कार्य किया जा रहा है। कार्यालय भवन भी नया बनाया जा रहा है। वहीं पानी के लिए नलकूप लगाया गया है। इससे पानी की व्यवस्था की जाएगी। पूरी बाउंड्री की ऊंचाई बढ़ाई जा रही है। जिससे सुरक्षा बढ़ेगी। गौरतलब है कि १९९६ में यहां गौण मंडी का निर्माण किया गया था। इसके लिए यहां पुलिस थाने के पीछे जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाई और कार्यालय बनाया गया था। इसके लिए यहां नीलामी का कार्य भी शुरू किया गया था। लेकिन कस्बे से दूरी अधिक होने से उस समय मंडी में नीलामी अधिक समय तक नहीं हुई। अब गत वर्ष से इसे मुख्य मंडी घोषित की गई है। इससे यहां ढाई करोड़ रुपए के कार्य कराए जा रहे है। जिससे सुविधाएं बढ़ेगी।



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