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video: कोई इनकी मदद करो भाई...ये यहां की हैल्प डेस्क है.

भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर. मुझे वार्ड नम्बर 108 में जाना हैं मैं कैसे जाऊंगा, रास्ता तो बता दीजिए...कृपया आप मुझे एक एम्बुलेंस बुलवा देंगे, तत्काल जरूरत हैं ...। ये दो सवाल ऐसे थे, जिसने हैल्प डेस्क की कलई खोल कर रख दी। पत्रिका टीम पहुंची बुधवार को महाराणा भूपाल हॉस्पिटल की हैल्प डेस्क में। ये हैल्प डेस्क मरीजों की मदद के लिए खोली गई है। इसका पूरा नाम चिकित्सा मंत्री हैल्प डेस्क हैं, लेकिन यहां बैठने वाले कार्मिकों को यहां क्या करना है, कैसे लोगों की मदद करनी है इसकी कोई जानकारी नहीं है, बिना किसी जानकारी या प्रशिक्षण के सीधा उन्हें यहां बिठा दिया गया है। जैसे ही ये दो सवाल यहां मौजूद एकमात्र कार्मिक के सामने दागे गए तो वह तपाक से बोल पड़ा कि मैंने तो ये वार्ड ही नहीं देखा। इसी तरह एम्बुलेंस बुलवाने की बात पर कार्मिक ने 108 वाहन बुलवाने को कहा लेकिन वह नहीं बुलवा पाए।

 

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- महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में गत दिनों खोली गई चिकित्सा मंत्री हैल्प डेस्क बिलकुल नाकारा है, किसी काम की नहीं, यहां जो कार्मिक बिठाएं गए हैं, ना तो वे पूरी तरह से हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं से वाकिफ हैं और ना ही कैसे किसी की मदद करनी है, ये उन्हें मालूम हैं। यदि आप इस हैल्प डेस्क पर किसी उम्मीद से पहुंचते हैं, तो ये फिलहाल पूरी नहीं होगी।

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आप वहां से पूछ लीजिए...

भीलवाड़ा से गणेशलाल यहां पहुंचे थे मदद मांगने के लिए। उन्हें डॉ असित मित्तल, वरिष्ठ विशेषज्ञ त्वचा से मिलना था, उनके मोबाइल नम्बर की जरूरत थी, जिसे यहां से उपलब्ध नहीं करवाया गया। उल्टे उन्हें यह कहकर चलता कर दिया गया कि बाहर से पूछ लीजिए।

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इसलिए खोली गई थी हैल्प डेस्क

इमरजेंसी परिसर में 102 नम्बर पर फोन करने पर सहायता देने व किसी को भी मदद की दरकार पर सबसे सरल मार्ग बताने के लिए इसकी शुरुआत की गई है। यहां पर एक चिकित्सक को ऑन कॉल, एक नर्सिंगकर्मी व एक वार्ड बॉय को लगाया जाना था, जबकि केवल एक व्यक्ति ही यहां रहता है, वह भी ऐसा जिसे चिकित्सालय का पूरा ज्ञान नहीं हो। बुधवार शाम को यहां पर मौजूद एक नर्सिंग कार्मिक ने यह स्वीकारा कि उन्हें किसी प्रकार का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया। उन्हें चिकित्सालय की भी पूरी जानकारी नहीं है, प्रयास करते है कि सबकी सहायता कर सकें।

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मैं कल गया था वहां, जिसकी ड्यूटी थी वह वहां नहीं मिले मैं कल काफी समय तक वहां पर बैठा था, जिसकी ऑफिशियल ड्यूटी वहां लगाई गई थी, वह वहां मौजूद नहीं थे, उनकी जगह किसी महिला नर्सिंगकर्मी को बिठाया गया था। ऐसा होना ही नहीं चाहिए। जल्द ही सभी को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे ये समझ जाए कि वहां पर बैठकर करना क्या है।

डॉ लाखन पोसवाल, अधीक्षक महाराणा भूपाल हॉस्पिटल उदयपुर

 

 

 

 

 



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