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एम्बुलेंस 108 सामने फिर भी इलाज को तड़प रहे मरीज, ऐसा क्या हुआ, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...

रायपुर मारवाड़. पाली। एम्बुलेंस 108 सामने हो फिर भी हादसे में घायल व्यक्ति इलाज के लिए तड़पता रहे तो फिर इसे क्या कहा जाएगा। चौंकना लाजिमी है, लेकिन पाली जिले के रायपुर स्थित अस्पताल में तो 108 एम्बुलेंस सेवा की कुछ ऐसी ही स्थिति है। जहां मरीजों के लिए ये सेवा मजाक मात्र बनी हुई है।
दरअसल, पिछले दिनों यहां के चिकित्सालय से एम्बुलेंस को हटा मारवाड़ जंक्शन भेज दिया। जब कस्बेवासियों ने विरोध किया और पत्रिका ने हालात उजागर किए तो उसी एम्बुलेंस को दो दिन बाद ही यहां के चिकित्सालय में दुबारा भेज दिया। लेकिन, स्टाफ आज तक नहीं भेजा। इससे ये एम्बुलेंस होकर भी मरीजों के उपयोग में नहीं आ रही है।
राजस्थान पत्रिका ने 14 मई को एम्बुलेंस व्यवस्था को लेकर मनमर्जी, मरीज हो रहे परेशान शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर हालात उजागर किए। इससे जिला प्रशासन हरकत में आया। दो दिन बाद ही उसी एम्बुलेंस को मारवाड़ जंक्शन से दुबारा यहां भेज दिया गया। एम्बुलेंस को लेकर जो चालक आया, वो एम्बुलेंस को चिकित्सालय परिसर में खड़ी कर चलता बना। अगले दिन अब पता चला कि न तो चालक है ओर न ही स्टाफ है तो कस्बेवासियों ने दुबारा जिला प्रशासन से शिकायत की। इसके बाद चालक तो भेज दिया। लेकिन स्टाफ आज तक नहीं भेजा है। इस एम्बुलेंस में तमाम सुविधाएं होनी चाहिए, लेकिन उनमें से गिनी चुनी ही है। जिससे मरीजों को पूरी सुविधा नहीं मिल पाएगी। आधी अधूरी सुविधा के साथ एम्बुलेंस भेज संचालन एजेंसी ने खानापूर्ति कर दी है।

सरकारी सेवा के साथ खिलवाड़

राज्य भर में आपातकालीन स्थिति में मरीज को तत्काल सुविधा के लिए 108 एम्बुलेंस की नि:शुल्क व्यवस्था शुरू की गई। जिले में इस व्यवस्था का संचालन जो एजेंसी कर रही है, वह सुविधा के नाम पर मनमर्जी कर मरीजों के साथ खिलवाड़ करती आ रही है। इस मनमर्जी को लेकर बीसीएमओ डॉ. सुरेश यादव भी कई बार शिकायत कर चुके है। इधर, कस्बे के शेर मोहम्मद ने भी मुख्यमंत्री को पत्र भेज शिकायत की है।

हां, स्टाफ नहीं है

यहां की एम्बुलेंस खराब हो गई तो उसे जोधपुर रिपेयर करने भेज दिया। यहां जैतारण से एम्बुलेंस भेजी गई। जिसे दो दिन बाद ही मारवाड़ जंक्शन भेज दिया। हमने उच्चाधिकारियों से शिकायत की। कस्बेवासियों ने भी विरोध किया। इसके बाद मारवाड़ से उसी एम्बुलेंस को दुबारा तो भेज दिया लेकिन स्टाफ नहीं भेजा है।

डॉ. सुरेश यादव, बीसीएमओ, रायपुर



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