अलवर जिले में पिछले डेढ़ साल से चुनावी सीजन रहा है। वर्ष 2018 के प्रारंभ में लोकसभा उपचुनाव फिर दिसम्बर में विधानसभा चुनाव हुए। वहीं पिछले दिनों ही लोकसभा चुनाव सम्पन्न हुए हैं। डेढ़ साल के दौरान जिले में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम नहीं हुआ और न ही मतदाताओं की संख्या में बड़ा फेरबदल हुआ, लेकिन चुनाव दर चुनाव परिणाम बदलते रहे। लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने अलवर लोकसभा क्षेत्र में 1 लाख 96 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की, वहीं विधानसभा चुनाव में वह तीन विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त ही सीमित रह गई। यह स्थिति तो तब है जब लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई। इतना ही नहीं कांग्रेस इस लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव की स्थिति को भी कायम रख पाने में विफल रही। इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस आठ विधानसभा क्षेत्रों में से 7 में पिछड़ी, वहीं राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी साढ़े दस हजार वोटों की मामूली बढ़त ले सकी। यही कारण रहा कि विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के परिणाम में कांग्रेस के 1 लाख 94 हजार 364 वोट कम हो गए।
भाजपा को हुआ फायदा
एक के बाद एक चुनाव होने का भाजपा को फायदा मिला, लोकसभा उपचुनाव में भाजपा अलवर लोकसभा क्षेत्र के एक भी क्षेत्र में बढ़त नहीं बना पाई, वहीं विधानसभा चुनाव में दो सीट जीतने में सफल रही। वहीं विधानसभा चुनाव से अब लोकसभा चुनाव में 1 लाख 69 हजार 147 वोट बढ़वाने में कामयाब रही।
सबसे ज्यादा नुकसान बसपा को
विधानसभा चुनाव से लेकर अब लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान बसपा को हुआ। विधानसभा चुनाव में बसपा ने अलवर लोकसभा क्षेत्र के दो विधानसभा क्षेत्रों में न केवल जीत दर्ज की, बल्कि 2 लाख 90 हजार 842 यानि 16 प्रतिशत से ज्यादा वोट लिए। अब लोकसभा चुनाव में बसपा के खाते में मात्र 56649 ही वोट आए। यानि बसपा को इस छोटे से समय में ही 2 लाख 34 हजार 193 वोटों का नुकसान हो गया।





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