उदयपुर।
बीमारी के चलते महज 20 दिन के अंतराल में मां-बाप शिवसिंह व दीपिका को खो देने वाले चार मासूमों किशनङ्क्षसह (11), पायल (8), यशराज (5) व प्रकाश (3) की पीड़ा से जहां पूरा मोहल्ला विचलित हो गया, वहीं इसी मोहल्ले के एक युवक ने बच्चों की पीड़ा हरने के बजाय सिर्फ तीन हजार रुपए की एवज में बच्चों की मां की मौत से पहले मकान के कागज ले लिए थे जिन्हें लौटाने के लिए वह आसानी से तैयार नहीं हुआ। ऐसे में राशि एकत्र कर कागज छुड़वाए गए।
पुलिस के मुताबिक पति की मौत के बाद मरणासन्न हालत में पड़ी महिला को पैसों की जरुरत थी। ऐसे में उसने ठेकेदारी करने वाले पड़ोस में रहने वाले मनीष से 3 हजार रुपए उधार लिए।
आरोप है कि इन रुपयों के बदले मनीष ने महिला से घर के कागज ले लिए। पैसे लेने के चार-पांच दिन बाद महिला की भी मौत हो गई। राजस्थान पत्रिका ने 29 अप्रेल के अंक में 20 दिन में ‘चार बच्चों के सिर से उठा मां-बाप का साया’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने प्रसंज्ञान लिया, वहीं सीडब्ल्यूसी ने हाथों-हाथ बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें ओपन शेल्टर में आश्रय दिया।
यों हकीकत आई सामने
बाल कल्याण समिति सदस्य बी.के.गुप्ता ने बताया कि मासूमों के बेहतर पुनर्वास व उनके सर्वोत्तम हित में उनकी पैतृक सम्पत्ति को कानूनन उनके नाम करवाने को लेकर सीडब्ल्यूसी ने मकान के कागज दिखवाए तो बच्चों ने सारी बातें बताई। मनीष से कागज मांगे गए तो वह 3 हजार रुपए देने पर ही कागज लौटाने को तैयार हुआ। जिस पर थाने के माध्यम से युवक को तलब कर दस्तावेज कब्जे में लिया।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने 29 अप्रेल के अंक में 20 दिन में ‘चार बच्चों के सिर से उठा मां-बाप का साया‘ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस पर सीडब्ल्यूसी ने इसकी जानकारी एएसपी (महिला परामर्श) माधुरी वर्मा को देते हुए संबंधित थाना पुलिस के बाल कल्याण अधिकारी को बच्चों को रेस्क्यू कर पेश करने के आदेश दिए। प्रतापनगर थाना पुलिस के मौके पर पहुंचने पर सीडब्ल्यूसी के सदस्य बी.के.गुप्ता, हरीश पालीवाल ने भी मौके पर पहुंच गए।





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