बीकानेर. मंगल एक ऐसा ग्रह है जो वीरता, साहस, छोटे भाई-बहिन, जमीन, रक्त, मज्जा आदि का कारक है। मंगल जिस भाव मे बैठता है उस भाव से तीन दृष्टियों से देखता है- चौथी दृष्टि से, सांतवी दृष्टि से और आठवीं दृष्टि से। मंगल मेष व वृश्चिक राशि का स्वामी होता है इन राशियों का स्वामी होकर केंद्र या त्रिकोण भाव मे बैठे तो मंगल रूचक योग का निर्माण करता है।
मांगलिक योग का निर्माण कब होता है
अगर जातक की कुण्डली में मंगल लग्न में बैठा हो, चतुर्थ भाव मे बैठा हो, सप्तम भाव मे बैठा हो, अष्टम भाव मे बैठा हो या द्वादश भाव मे बैठा हो तो मांगलिक योग का निर्माण होता है।
क्या है मांगलिक योग के परिणाम
हमेशा से सुनने में आया है कि बुरा ही प्रभाव डालता है लेकिन यह ग्रह बुरे के साथ साथ अच्छा प्रभाव भी देता है वो कैसे...? मंगल कुंडली वाले जातक या फिर हम कह सकते है कि मांगलिक कुंडली वाले जातक अपने कार्य क्षेत्र में, नोकरी में, व्यापार में, गृहस्थ जीवन और वैवाहिक जीवन में भी उनके कार्य करने की क्षमता इतनी तेज होगी कि वे हर किसी को पीछे छोड़ देंगे अर्थात उनकी स्टैमिना पॉवर बहुत ज्यादा होगी।
-ज्योतिष सलाहकार श्याम सुन्दर बोड़ा, बीकानेर





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