पाटोदी. कस्बे में नियमित जलापूर्ति नहीं होने से रहवासी राहत को तरस गए हंै। कहने को तो कस्बे में मीठे पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन यहां तो समय पर खारा पानी भी नहीं मिल रहा। इससे हर दिन कस्बेवासियों को परेशानी उठानी पड़ती है। अनियमित व कम समय के लिए जलापूर्ति पर रहवासियों को एक दिन की जरूरत जितना पानी नसीब नहीं होता है। कस्बे में सूखी हौदियां, खेळियों के चलते पशुधन बेहाल है। पानी की तलाश में ये पूरे दिन इधर से उधर भटकते हैं। जबकि परियोजना अधिकारियों का कहना हैे कि सप्ताह में दो बार मीठे पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन हकीकत में सप्ताह में एक दिन भी जलापूर्ति नहीं की जाती है। कहीं जगहों पर जलापूर्ति किए एक माह से अधिक समय बीत गया है। इससे आमजन में रोष है।
महंगा पानी वह भी समय पर नहीं- ग्रामीणों के अनुसार सरकारी जलापूर्ति अपर्याप्त होने से महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है। आसपास के जल स्रोतों में पानी की कमी के चलते टैंकर संचालक दूर से पानी लेकर आते हैं। वे मनमानी दर लगाते हैं और समय पर पानी भी नहीं पहुंचाते।
पशुधन को लेकर चिंता- पशुपालकों को इस बात की चिंता है कि पशुधन के लिए पानी का प्रबंध कैसे करें। एक टैंकर पांच सौ रुपए में मिल रहा है, वह भी दो दिन की वेटिंग के बाद। पशुखेळियों में पानी आ नहीं रहा। एेसे में पशुधन कैसे बचाएं।
समय पर नहीं जलापूर्ति- समय पर जलापूर्ति नहीं होने से परेशान हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। मोल महंगा पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। - संगीता सोनगरा
समस्या का नहीं समाधान- पानी के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत करवाया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। इससे पशुओं की हालत सबसे अधिक खराब है। - घमंडाराम पंवार
दो बार जलापूर्ति- सप्ताह में दो बार मीठे पानी की आपूर्ति दी जाती है। आगे जलापूर्ति करना जलदाय विभाग का काम है। - लक्ष्मणराम कला, अधिशासी अभियंता लिफ्ट परियोजना
पता करवाता हूं- जलापूर्ति को लेकर कहीं कोई समस्या आ रही है तो संबंधित सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंता से बात कर समाधान किया जाएगा। इस संबंध में पता करवाकर बताता हूं। - बाबूलाल मीणा, अधिशासी अभियंता जलदाय विभाग





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