सीकर.
अभावों में पला, खेल के दम पर अच्छे स्कूल में दाखिला और अब सपनों की उड़ान भर विदेश में खेलकर अपनों का नाम रोशन करने चला है हमारा बुधिया। लेकिन यहां भी अभाव बड़ी मुसीबत बनकर सामने आ खड़े
हो गए हैं।
बुधिया सीकर में पंचमुख बालाजी के पास एक छोटे से लोहे की चद्दरों से बने घर में पांच बहनों और माता-पिता के साथ रहता है। बाए हाथ से दिव्यांग पैराओलंपिक खिलाड़ी बुधिया यानी साबरमल बावरिया का चयन 16 से 20 मई तक नैरोबी केन्या में आयोजित रेम्पूटी फुटबॉल कन्फेडरेशन अफ्रीका कप-2019 के लिए हुआ है, लेकिन खेल की प्रतिभा दिखाने विदेश जाने के लिए बुधिया के पास पैसे नहीं हैं। इस तरह की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना हर खिलाड़ी के लिए एक सपना होता है। ऐसे मौके बार-बार नहीं मिलते हैं। लेकिन केन्या में फुटबॉल खेलने के लिए बुधिया को 70 हजार रुपए की जरुरत है। बिना किसी मदद के इतनी बड़ी रकम जुटाना बुधिया के परिवार के लिए मुमकिन नहीं हैं। बुधिया की बहन सरिता बावरिया भी ऑलराउंडर खिलाड़ी है।
त्रिवेंद्रम में प्रशिक्षण
प्रतियोगिता से पहले बुधिया त्रिवेंद्रम एलएनसीपीइ, केरल में 6 से 14 मई तक चलने वाली ट्रनिंग कैंप में इंडियन टीम के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करेगा। बुधिया के अलावा प्रदेश के 11 अन्य जिलों के पैरालंपिक खिलाड़ी भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा बनेंगे। बुधिया अब तक कुल 65 पदक हासिल कर चुके हैं। इनमें से 15 से 20 स्वर्ण पदक हैं। खेलों के दम पर ही दोनों भाई-बहन केशवानंद शिक्षण संस्थान में अच्छी पढ़ाई कर रहे हैं।





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