बाड़मेर. मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध राजकीय अस्पताल में सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट तैयार होने के बाद जिला अस्पताल प्रबंधन के सर्वे में कुछ कमियां मिलने पर हस्तांतरण अटक गया है। हालांकि ट्रॉयल शुरू भी हुआ, लेकिन पीएमओ की आपत्ति के बाद उसे हैंडओवर नहीं किया है। अब चिह्ति कमियों को सुधारने के बाद हस्तांतरण किया जाएगा।
दो पैनल में हैं 16 सिलेंडर
प्लांट में 16 ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए हैं। इनसे पाइप लाइन से ऑक्सीजन पहुंचाई जाएगी। इसमें 8-8 सिलेंडर के सैट हैं। इसमें एक सैट के सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म होने पर दूसरे सेट से आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इसके चलते ऑक्सीजन की आपूर्ति निर्बाध रहेगी।
ऑपरेशन में मिलेगी राहत
सेंट्रल प्लांट से 6 पाइप लाइन जुड़ी हुई हैं। इसमें वार्ड के लिए ऑक्सीजन की पाइप लाइन है तो इमरजेंसी, आइसीयू व ऑपरेशन थियेटर के लिए ऑक्सीजन के साथ सैक्शन, मेडिकल एयर आदि अतिरिक्त होंगे। इससे कई जटिल ऑपरेशन में आने वाली दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।
पैनल से रहेगी निगरानी
सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट में अलग-अलग पैनल लगाए गए हैं। इसमें यह पता चलेगा कि कौनसे सिलेंडर में ऑक्सीजन की कमी है। पैनल पर आंकड़ों में सब कुछ नजर आएगा। इसके अलावा अलार्म सिस्टम भी लगाया गया है जो प्लांट से सप्लाई होने वाली ऑक्सीजन में कुछ भी खराबी आने पर बजेगा। वहीं ऑक्सीजन कम होने की स्थिति में भी अलार्म सचेत कर देगा।
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फैक्ट फाइल
16 ऑक्सीजन सिलेंडर लगेंगे
8-8 के पैनल में लगाए जाएंगे सिलेंडर
1 सिलेंडर इमरजेंसी उपयोग के लिए
2 सिलेंडर मेडिकल गैस के लिए अलग से होंगे
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- नहीं हुआ हैंडओवर
ऑक्सीजन प्लांट तैयार है। अस्पताल ने प्लांट का सर्वे करवाया। इसमें कुछ कमियां पाई गई हैं, उसको सुधारने के लिए निर्देश दिए हैं। उसके बाद हैंडओवर किया जाएगा। - संजीव मित्तल, पीएमओ, राजकीय अस्पताल, बाड़मेर





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