चित्तौडग़ढ़. बेटियां हाथ पीले नहीं करना चाहती थी लेकिन अभिभावक बचपन में ही शादी के बंधन के बांधने जा रहे थे। ऐसे में मजबूर बेटियां घर छोड़ भाग चली आई बाल कल्याण समिति के पास इस गुहार के साथ कि उनकी शादी करने से परिजनों को रोका जाए। समिति ने ऐसी बेटियों को आसरा देने के साथ माता-पिता की समझाईश की और बेटियां उन्हें तभी वापस दी गई जब इस बात को पुख्ता कर लिया गया कि अब बालिग होने से पहली उन बेटियों की शादी का प्रयास नहीं किया जाएगा। बेटियों के घर से भागने की इस तरह की घटनाएं अमूमन अक्षय तृतीया एवं आसपास की अवधि में अधिक हुई। चित्तौडग़ढ़ बाल कल्याण समिति के पास गत तीन वर्षो में इस तरह के ४६ प्रकरण आए जिनमें नाबालिग बेटियां शादी नहीं करना चाहती थी लेकिन माता-पिता उन्हें विवाहसूत्र में बांधने के तत्पर थी। समिति ने इस वर्ष तीन बाल विवाह भी रूकवाएं और परिजनों को बच्चों को बालिग होने तक ऐसा नहीं करने के लिए पाबंद भी किया।
समझाईश एवं काउसलिंग का सहारा
बाल कल्याण समिति ने बाल विवाह से बचने के लिए भाग कर आई बेटियों को आसरा बालिका ओपन शेल्टर होम में आश्रय दिया। यहां ऐसी बालिकाओं को तब तक शरण दी जाती है जब तक वो घर नहीं लौटना चाहती है। बालिकाओं के माता-पिता की समझाईश के साथ उन्हें बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में अवगत कराने के लिए काउसलिंग भी की जाती है।
बाल कल्याण समिति ने तीन वर्ष में ४६ बेटियों को बाल विवाह से बचाया
वर्ष २०१८-१९
रूकवाएं ३ बाल विवाह
बाल विवाह करने के कारण घर छोड़ कर आई १८ बालिकाएं
वर्ष २०१७-१८
बाल विवाह करने के कारण घर छोड़ कर आई १७ बालिकाएं
वर्ष २०१६-१७
बाल विवाह करने के कारण घर छोड़ ककर आई ११ बालिकाएं.
जिले में कहीं भी बाल विवाह होने की सूचना मिले तो समिति प्रसंज्ञान लेती है। बाल विवाह से बचने के लिए घर से भागकर जो बालिकाएं आती है उन्हें समिति पूरा संरक्षण प्रदान कर रही है। ऐसी बालिकाओं के अभिभावकों की काउसलिंग व समझाईश करते है।
सुशीला लढ़ा, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, चित्तौडग़ढ़





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