गंगापुरसिटी . सूबे के समृद्ध शहरों में शुमार किए जाने वाले गंगापुर का इतिहास स्वर्णिम रहा है। इसकी कई खासियतें शहरवासियों के गुरुर की वजह भी बनती हैं, लेकिन शहर को शिखर पर ले जाने का दावा करने वाले जिम्मेदार इसकी स्थापना के ऐतिहासिक दिन को ही बिसरा चुके हैं। सदियों तक कायम रहने वाली परम्परा को नगरपरिषद ने महज एक बार रस्म सरीखी निभाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है।
जानकार बताते हैं कि शहर का स्थापना दिवस 1 मई है। इस ऐतिहासिक दिन का जश्न मनाने की शुरुआत वर्ष 2016-17 में हुई। शहर में एक समिति ने जन-जन तक शहर के गौरव को पहुंचाने की पहल की, लेकिन वर्ष २०१८ में इसे नगरपरिषद ने स्थापना दिवस का जश्न मनाने का जिम्मा अपने सिर ले लिया। इसके बाद समिति गौण हो गई। नगरपरिषद ने शहर की शान में कसीदे पढ़ते हुए तीन दिन तक कार्यक्रम किए, लेकिन वर्ष २०१९ में परिषद ने अपने शहर के हैप्पी बर्थ-डे को बिसरा दिया। एक बार फिर समिति ने आरती कर शहर के स्थापना दिवस की परंपरा को जीवंत रखने का काम किया है।
इनका कहना है
लोकसभा चुनाव के चलते शहर में इन दिनों आचार संहिता लागू है। इसके चलते हम कोई कार्यक्रम नहीं करा सकते। आचार संहिता की वजह से शहर का स्थापना दिवस पर कार्यक्रम नहीं किया गया।
- संगीता बोहरा, सभापति नगरपरिषद गंगापुरसिटी
अमन-चैन व खुशहाली की कामना कर मनाया शहर का स्थापना दिवस
गंगापुरसिटी . गंगापुरसिटी स्थापना महोत्सव समिति के तत्वावधान में गंगापुरसिटी स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को शहर के गणमान्य लोगों ने गंगा माता मंदिर में माता की महाआरती कर स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर प्रसाद वितरित कर शहर में अमन-चैन और खुशहाली की कामना की गई। कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष हेमन्त शर्मा, सचिव सूरजप्रसाद गर्ग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम रावत, सह सचिव दीपक नरूका, कार्यक्रम प्रभारी देवन्द्र पाठक, सदस्य ओमप्रकाश धर्मकांटा, महेश पाल, सीताराम, दीवान खंडूजा, अमृत मीना, गोविन्द गुप्ता, वेद प्रकाश, महेन्द्र दीक्षित, जितेन्द्र उपाध्याय, विनोद जोशी, विनोद खण्डेलवाल, पंडित कैलाश शर्मा, महेशपाल, शिवराज मीना, मुकेश मीना, सुरेश स्काउट, भगवान भंडारी, अनुज जैन, चेतन मोदी, नरसी एवं संजय आदि मौजूद रहे।





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