कोटा. एमसीआई चिकित्सा संस्थानों ( medical institute ) के शिक्षकों के पढ़ाने की योग्यता की नियमावली के लिए संशोधित निमयावली जारी की गई है। इसमें पीजी क्लासेज ( PG classes ) को पढ़ाने के लिए अब चिकित्सा शिक्षकों ( Medical teachers ) को स्नातकोत्तर डिग्री लेने के बाद 8 साल का अध्यापन अनुभव लेना होगा। साथ ही, सहायक आचार्य के रूप में चार वर्ष का अध्यापन अनुभव दो शोध पत्र भी अनिवार्य कर दिए गए हैं। भारत सरकार के राजपत्र में भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के अधिक्रमण में शासी बोर्ड अधिसूचना जारी की।
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चिकित्सा संस्थानों में शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यताएं विनियमावली 1998 में अनुसूची-1 में 5 जून 2017 की अधिसूचना के संशोधन किया गया। इसके तहत चिकित्सा संस्था में स्नातकोत्तर कक्षाओं में अध्यापक के लिए अब किसी मेडिकल कॉलेज या संस्थान में कुल 8 वर्ष का अध्यापन अनुभव रखने वाले स्नातकोत्तर अध्यापक के रूप में अध्यापकों को मान्यता दी जाएगी। इसमें कम से कम चार वर्ष का अध्यापन अनुभव स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के बाद का मान्य होगा।
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इसके साथ ही सहायक प्रोफेसर के रूप में जरनलों में दो अनुसंधान प्रकाशन भी होने चाहिए।
अति विशेषज्ञताओं के मामले में केवल उन्हीं अध्यापकों को स्नातकोत्तर अध्यापक के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिनके पास 6 वर्ष का अध्यापन अनुभव हो। इसमें से दो वर्ष का अध्यापनअनुभव, उच्चतम विशेषज्ञता डिग्री प्राप्त करने के बाद सहायक प्रोफेसर के रूप में होना अनिवार्य होगा।
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खाली पदनाम से नहीं बन सकेंगे पीजी गाइड
वह सहायक आचार्य जिन्होंने इस पद पर आठ वर्ष लगातार कार्य किया हो, जिनके दो शोध पत्र एमसीआई के मानदंड के अनुरूप हो और किन्हीं कारणों से पदोन्नत नहीं हो सकें। (विभिन्न राज्य सरकार के प्रावधानों के अनुसार) भी पीजी टीचर कहलाएंगे। खाली पदनाम से पीजी गाइड नहीं बनाए जा सकेंगे। पीजी रेजीडें्टस के गाइड वहीं बन सकेंगे, जो 8 वर्ष का स्नातकोत्तर डिग्री के बाद अध्यापन अनुभव रखते हों।
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शोध पत्रों के नियम भी बदले
शोध पत्रों की परिभाषा भी अलग थी। अब तक शोध पत्रों के लिए प्रथम व द्वितीय लेखक मान्य थे, लेकिन अब केवल प्रथम लेखक या पत्राचार लेखक (कोरसपोडिंग ऑथर) का आवश्यक होगा।





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