राजेंद्र देणोक
जालोर. सत्ता संग्राम के लिए भिड़ रहे दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए मारवाड़ का रण बड़ा ही रोचक संयोग लेकर आया है। ठीक 150 दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फिर चुनावी दौरे पर गुरुवार को जालोर में थे। 151 वें दिन यानि शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी यहां चुनावी सभा करेंगे। इसे संयोग कहें या चुनावी रणनीति का हिस्सा, दोनों की सभाओं का स्थल और समय का अंतराल समान है। फर्क सिर्फ इतना कि पिछली बार राज्य में सरकार बनाने-उखाडऩे के लिए वोट मांगने आए थे। इस बार केन्द्र की सत्ता मुख्य टारगेट है। लेकिन बड़ा सवाल ये कि जालोर का रण दोनों में से किसके लिए मुफीद रहेगा।
विधानसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बावजूद मारवाड़-गोडवाड़ में भाजपा बाजी मार गई थी। विधानसभा चुनावों में मारवाड़-गोडवाड़ की कुल 14 सीटों में से कांग्रेस को महज एक सीट से ही संतोष करना पड़ा था। जबकि भाजपा 11 सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही। दो कांग्रेस के बागी निर्दलीय के रूप में परचम लहराने में सफल हुए थे।
प्रतिष्ठा का सवाल
जालोर-सिरोही संसदीय सीट कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। राहुल पांच महीने में लगातार दो चुनावों में यहां प्रचार करने आए हैं। खास बात यह भी कि लोकसभा चुनाव में पूरे जोधपुर संभाग में अब तक केवल जालोर में ही राहुल की चुनावी सभा हुई है। राहुल की प्रतिष्ठा का सवाल इसलिए भी है कि 1999 के बाद कांग्रेस यहां दोबारा कभी नहीं जीत पाई। जबकि पूर्व में यहां कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। नवम्बर में विधानसभा चुनावों में मारवाड़ में कांग्रेस के लिए समर्थन जुटाने आए राहुल गांधी जोधपुर संभाग में खासा असर छोड़ गए थे। 26 नवम्बर 2018 को जोधपुर संभाग के पोकरण, जोधपुर व जालोर में एक ही दिन तीन चुनावी सभाएं की थीं। कांग्रेस को जोधपुर, बाड़मेर व जैसलमेर में सफलता मिली। लेकिन जालोर, सिरोही व पाली में कांग्रेस को निराशा हाथ लगी थी।
जीत बरकरार रखने की चुनौती
इसी तरह, भाजपा के लिए भी यह सीट कम प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। 2004 से लगातार तीन चुनाव जीत रही भाजपा के लिए यहां जीत का सिलसिला बरकरार रखना चुनौती है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शुक्रवार को रामसीन में चुनाव सभा संबोधित करेंगे। यानि शाह का दौरा सफल बनाने और विधानसभा चुनाव की तरह यहां से परिणाम लेना भी पार्टी के लिए साख का सवाल है। विधानसभा चुनावों में भी शाह ने जालोर, सिरोही व पाली में चुनावी सभाएं की थी। तब शाह का दौरा इसलिए सफल माना गया था क्योंकि तीनों जिलों में 11 सीटें जीतने में भाजपा सफल हो गई थी। इस बार भाजपा ने पूरा लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय मुद्दों पर फोकस किया है, लेकिन स्थानीय मुद्दे गौण है। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को पानी और टे्रनों का स्थानीय मुद्दा उठाकर मतदाताओं को साधने का प्रयास कर गए हैं।





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