कोटा. शहर व ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या सिर चढ़कर बोल रही है। टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ रहा है। जमीन में पानी पाताल को छू रहा है। इससे कई इलाकों में कुएं बावड़ी सूख रहे हैं। चंबल किनारे बसी कई बस्तियों में तो पेयजल समस्या विकराल रूप ले चुकी है। हालात ये हैं कि पानी के लिए मारामारी हो रही है। प्रेमनगर के अलावा अन्य कई क्षेत्रों में जलदाय विभाग को टैंकरों से पेयजल सप्लाई करना पड़ रहा है।
शहर के इन क्षेत्रों में टैंकर का भरोसा
जानकारी के अनुसार शहर के विभिन्न इलाकों में 12 टैंकरों से 72 ट्रिप पानी की सप्लाई की जा रही है। आंवली क्षेत्र में 12, रोजड़ी में 10, बरड़ा व क्रेशर बस्ती में 2, रथकांकरा में 2, अनंतपुरा तालाब क्षेत्र में 3, सुभाष विहार क्रेशर बस्ती में 1, पुनिया देवरी में 1, रंगबाड़ी क्षेत्र में 7, राणपुर में 3, जगपुरा में 4, लखावा, शांतिनगर, सूर्यनगर, रात्या चौकी व डाढ़देवी में एक-एक, प्रेमनगर तृतीय क्षेत्र में टावर वाली गली में 3 टैंकर पानी पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में बोराबास मंडाना में पानी की स्थिति विकट है।
400 रुपए तक भुगतान
शहर के विभिन्न इलाकों में पानी की किल्लत का फायदा टैंकर संचालक उठा रहे हैं। अकेले राजीव गांधी नगर क्षेत्र में 50 से अधिक टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। क्षेत्र वासियों के अनुसार बहुमंजिला इमारते होने से नहाने व अन्य कार्यों के लिए लोग टैंकरों का पानी उपयोग में ले रहे हैं। लोगों को एक-एक टैंकर के बदले 400 रुपए तक भुगतान करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि क्षेत्र में दोपहर तक टैंकर दौड़ते रहते हैं।
पानी के पाइपों का बिछ रहा जाल
शहर के कई इलाकों में बोरिंग ही लोगों के लिए पानी का सहारा हैं। राजीव गांधी नगर समेत अन्य कई इलाकों में स्थित बहु मंजिला इमारतों में से अधिकतर लोग बोरिंगों के सहारे हैं। प्रेमनगर इलाके के लोग वर्षों से पानी की समस्या से त्रस्त है। इन हालातों में लोगों को बोरिंगों से पानी खरीदना पड़ रहा है। क्षेत्र में तारों की तरह छतों से पानी के पाइपों का जाल बिछा हुआ है।





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