गंगापुरसिटी . मजदूर दिवस के मौके पर बुधवार को शहर में मकान निर्माण सहित अन्य मजदूरी का कार्य करने वाले श्रमिकों का समाजसेवी विमला मीणा की ओर से सम्मान किया गया।
समाजसेवी विमला मीणा ने बताया कि उन्होंने लाटा हाउस गली सहित अन्य जगहों पर जाकर मजदूरों को उनके अधिकार बताए। मीणा ने बताया कि जिन मजदूरों के लिए यह दिवस मनाया जा रहा है, वह इससे अनजान थे। मीणा ने कहा कि इस दिवस की शुरुआत 1 मई 1886 से हुई थी। वर्ष 1889 में मजदूर दिवस मनाने का ऐलान हुआ। उन्होंने कहा कि धूप में मजदूरी करने वाले को हम मजदूर समझते हैं, जबकि मजदूरी करने वालों से समाज मजबूत एवं परिपक्व बनता है। यह ऐसे लोग हैं, जो समाज को मेहनत और बेहतर करने की सीख देते हैं। मजदूर को मजबूर समझना हमारी नासमझी है।
वह अपनी मेहनत की रोटी खाता है। ऐसे लोग स्वाभिमानी होते हैं। उन्होंने श्रमिकों को सरकार की ओर से श्रमिकों को देय सुविधाओं की जानकारी दी। इस दौरान पुरुष श्रमिकों का साफा बांधकर एवं महिला श्रमिकों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। साथ ही उन्हें मिठाई वितरित की गई।
मजदूर को मजदूर समझना सबसे बड़ी गलती - चंदेल
बामनवास . स्थानीय तालुका विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में बुधवार को श्रमिक दिवस के मौके पर लाडाका ढाणी में विधिक जागरुकता शिविर लगाया गया। इसमें लोगों को संबोधित करते हुए आरजेएस एवं समिति अध्यक्ष मनमोहन चंदेल ने कहा कि दुनिया के करीब 80 देशों में एक मई को अवकाश रहता है। इसकी शुरुआत 1 मई 1886 से हुई थी तथा 1889 में मजदूर दिवस मनाने का ऐलान किया गया।
मजदूर का मतलब हमेशा गरीब से नहीं होता, बल्कि मजदूर वह इकाई है, जो हर सफलता का अभिन्न अंग है। फिर चाहे वह ईंट-गारे में संदा आदमी हो या ऑफिस की फाइलों के तले दबा कर्मचारी। हर वो इंसान जो किसी संस्था के लिए कार्य करता है, उसके बदले में पैसा लेता है वह मजदूर है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में मजदूर वर्ग को हमेशा गरीब समझा जाता है। धूप में मजदूरी करने वाले को हम मजदूर समझते हैं, जबकि मजदूरी से समाज मजबूत एवं परिपक्व बनता है। समाज को सफलता की ओर ले जाते हैं।
शारीरिक तथा मानसिक रूप से मेहनत करने वाला हर इंसान मजदूर होता है। उन्होंने कहा कि मजदूर को मजबूर समझना हमारी सबसे बड़ी गलती है। वह अपने खून पसीने की खाता है। ये ऐसे स्वाभिमानी लोग होते हैं, जो थोड़े में भी बहुत खुश होते हैं। इस मौके पर लोगों को सरकार द्वारा श्रमिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, कानूनी हक एवं श्रम न्यायालय के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में ग्रामीणों के अलावा स्थानीय अभिभाषक संघ के सदस्य भी मौजूद रहे।





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