स्वास्थ्य विभाग उदासीन: बिना जांच-पड़ताल बिक रहे ज्यूस से खतरे का अंदेशा
आहोर. कस्बे समेत क्षेत्र में इन दिनों जहां गर्मी कहर बरपा रही है वहीं गर्मी से राहत पाने के लिए विभिन्न ज्यूस की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन बिना विभागीय जांच व पड़ताल के विभिन्न स्थानों पर खुले में बिक रहा गन्ने, आम समेत नाना प्रकार के फलों का रस बीमारियों को भी न्यौता दे रहा है। सड़क किनारे विभिन्न खाद्य पदार्थ खुले में बेचे जा रहे हैं। इन्हें ढककर नहीं रखा जा रहा, जिससे मक्खी, मच्छर इन पर बैठे रहते है और बीमारियों को बढ़ावा देते हैं।
खुले में बिक रहे गन्ने, आम समेत अन्य फलों के रस की दुकानों पर रस के रूप में बीमारी पिलाई जा रही है। गले को तर करने के लिए पीया जाने वाला यह रस पेट की बीमारियों को जन्म देने का कार्य कर रहा है। यहां न तो धूल मिट्टी से बचाव के साधन अपनाए जा रहे हैं और न मक्खियों से बचाव किया जा रहा है। दस रुपए प्रति गिलास की दर पर बिक रहे रस में जो बर्फ मिलाई जाती है, वह भी मानक से परे होती है। कस्बे में इन फलों के रस की दुकानों की जांच स्वास्थ्य विभाग ने आज तक नहीं की है। बाजार में गन्ना, संतरा, मौसमी सहित कई फलों का रस मिल रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग खुले में बिक रहे इन पदार्थो पर रोक लगाने के लिए कोई कार्रवाई करता नहीं दिख रहा।
दुकानदारों को लाइसेंस अनिवार्य
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की संख्या 31 के तहत सभी खाद्य कारोबार कर्ताओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य है। सार्वजनिक व निजी रूप से खाद्य पदार्थों का निर्माण, पैकेज, भंडारण, वितरण या आयात करता है तो इस अधिनियम के तहत लाइसेंस या पंजीकरण जरूरी है। इसके अतिरिक्त खाद्य सेवा कैटरिंग खाद्य संघटक की बिक्री भी पंजीकरण के प्रावधानों में है। छोटा फुटकर विक्रेता, फेरी वाला, अस्थायी स्टाल धारक, कैटरर, कार्यक्रम में खाद्य वस्तुओं का वितरण को भी इस अधिनियम के तहत शामिल किया गया है।
गंभीर नहीं है स्वास्थ्य विभाग
खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पालना को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा। इस तरह की दूषित खाद्य सामग्री खाने से लोगों के सेहत पर प्रभाव पड़ सकता है। शादियों के सीजन में दुकानदार थोड़े से फायदे के लिए बासी और सड़ी-गली खाद्य सामग्री भी कम दाम में बेच रहे हैं। खुले में बिकती खाद्य सामग्री पर रोक लगाने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस प्रयास शुरू नहीं हुए है।
मूकदर्शक बने ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग अधिकारी इस मामले में गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। एक तरफ जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है और दूसरी ओर जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हैं। संभवतया ऐसी बेपरवाही में ही इस तरह के मामले पनप रहे हैं। स्थानीय स्तर पर केवल आगे अवगत कराने की बात कह रहे हैं। ब्लॉक सीएमओ ने बताया कि इस मामले में सीएमएचओ कार्यालय को अवगत कराया जाएगा।
अवगत कराएंगे...
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में अवगत करवाया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ.वीरेन्द्र हमथानी, बीसीएमओ, आहोर





No comments:
Post a Comment