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मतदान मेरा अधिकार, सरकार बनाने में हम भागीदार

 

पहली बार मतदान के लिए दिसावर से आए युवा, बूथ से बाहर आते ही यादगार के रूप में ली सेल्फी


जालोर. गर्मी के बावजूद लोकतंत्र के इस महापर्व में आहुति देने का अपार उत्साह बना रहा। युवाओं में खासी आतुरता रही। सुबह से ही युवा न केवल खुद मतदान करने को आगे रहे, बल्कि अन्य लोगों को भी बूथ तक लाते रहे। मतदान के लिए कई युवा दिसावर से वतन लौटे हैं। इनमें से अधिकतर ने पहली बार मतदान किया। युवाओं ने बताया कि मतदान हमारा अधिकार है सरकार बनाने में हम भागीदार बनेंगे इसी उत्साह के कारण खासतौर से गांव आए हैं। बागरा के समीप नागणी गांव में कई युवा टोली के रूप में बूथ तक पहुंचे तथा मतदान किया। इनमें से कई युवा दक्षिण भारतीय राज्यों में व्यवसायरत है। सिरोही में अध्ययनरत दिलीप रावल ने बताया कि अधिकतर युवक अब अन्य राज्यों में व्यवसाय कर रहे हैं और ऐसे ही मौकों पर हम एक साथ होते हैं। मनोज जोशी, दिलीप जोशी, दिनेश बोराणा, राजू जोशी, भरत बोराणा, शंकरलाल देवासी, विक्रमसिंह, श्रवणसिंह, हंसाराम प्रजापत आदि एक साथ बूथ पर पहुंचे और लोकतंत्र के इस महायज्ञ में आहुति दी। बूथ से बाहर आते ही यादगार के रूप में सेल्फी और फोटो लिया। बताया कि हम में से अधिकतर ने पहली बार मतदान किया है। बूथ के अंदर जाने और मशीन पर बटन दबाने से लेकर बीप की आवाज आने तक के पूरे नजारे से पहली बार रूबरू हुए। मतदान को लेकर उनमें उल्लास इस कदर था कि वे दो दिन पहले ही यहां आ गए। सगे-सम्बंधियों से मिलना-जुलना हो गया और मतदान भी कर दिया। व्यवसाय के लिए अब वापस रवाना हो जाएंगे।


बस स्टैंड पर युवाओं का जमघट
भेटाला में बस स्टैंड पर एक दुकान के समीप युवाओं का जमघट दिखा। दुकान संचालक कांतिलाल राजपुरोहित ने बताया कि गांव के कई युवा मतदान के लिए मारवाड़ आए हैं। सुबह-सुबह कतार में लग कर मतदान किया, अब गपशप कर रहे हैं। गांव के अन्य लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित किया गया। चांदना गांव में भैंस चराने जा रहे गबरू खां ने बताया कि मतदान अभी करना है। बूथ पर भीड़ थी इसलिए पहले मवेशियों को कुएं पर छोडऩे जा रहा हूं, वापस आकर मतदान करूंगा।


पेड़ों की छांव में बनते समीकरण
नागणी गांव के जागनाथ महादेव मंदिर में भी लोगों की भीड़ रही। यहां पेड़ों की छांव में बैठे लोग चुनावी समीकरण पर चर्चा करते नजर आए। कोई किसी का पलड़ा भारी बता रहा था तो कोई किसी का। यहां दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थक बैठे हुए थे, जो अपने-अपने प्रत्याशी की हार-जीत को लेकर समीकरण बता रहे थे। कुछ बुजुर्ग इन चर्चाओं को विराम देने के लिए यह भी कहते नजर आए कि जो जीतना होगा जीत जाएगा हमें क्या।


ये सप्ताह बाद चुनेंगे भाग्य विधाता
बागरा में रेलवे क्रॉसिंग पर कार के विंडो कवर बेच रहा एक युवक राकेशकुमार चुनाव की इस गहमागहमी से दूर दिखा। पूछा कि वोट देने नहीं गए तो बताया कि मैं हनुमानगढ़ के नाहर से हूं और मेरे यहां अगले चरण में सप्ताहभर बाद चुनाव है। माल खरीदने के लिए दो-चार दिन में जाऊंगा, तब मतदान करके आऊंगा। हम लोग परिवार में विचार-विमर्श करने के बाद ही प्रत्याशी को वोट करते हैं।


छाया के लिए खुद ही किया प्रबंध
बागरा में बीएलओ हनुमानराम मेघवाल के सान्निध्य में मतदाताओं की मदद के लिए स्काउट काम करते नजर आए। वहीं मतदान केंद्र के बाहर एक प्रत्याशी के बूथ पर बैठे किरण मालवीय ने धूप से बचाव के लिए टेंट लगवा दिया। बताया कि वे टेंट का व्यवसाय करते हैं इसलिए छाया का प्रबंध खुद ही कर लिया। यहां गिरीशकुमार व अन्य कार्यकर्ता केसरिया साफा बांधकर मतदाताओं को आकर्षित करते दिखे।



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