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बालोतरा.
बाड़ ही जब खेत को खाए, तब पीछे क्या रहेगा। मरुगंगा लूणी नदी में अतिक्रमण मामले में कुछ ऐसा ही है। शहर में हुए औद्योगिक विकास व इससे जमीनों की बढ़ी कीमतों पर पहले प्रभावशाली लोगों ने अतिक्रमण किए तो नगर परिषद भी इसमें पीछे नहीं रही। परिषद ने नदी के बहाव क्षेत्र में उद्यान तो बायपास का निर्माण करवाया। इसे हटाने को लेकर कार्रवाई करना तो दूर अधिकारियों ने कार्य के दौरान एेतराज तक नहीं जताया। तत्कालीन अधिकारियों की आंखों के नीचे कार्य होने के बावजूद उन्होंने आंखें मंूद कर रखी।
दो दशक में शहर के हुए औद्योगिकरण पर जमीनों की कीमतों में जोर उछाल आया। आवासीय व व्यापारिक कार्य के लिए जमीनों की बढ़ी मांग पर प्रभावशाली लोगों के हाथों में बैठे बिठाए नया धंधा हाथ लग गया। उन्होंने नदी के बहाव क्षेत्र में बढ़चढ़ कर अतिक्रमण किया। अब तक राजस्व टीमों के दो बार किए सर्वे में 96 अतिक्रमण चिह्नित हो चुके हैं। यह सर्वे चार वर्ष पूर्व किया गया था। अब नया सर्वे किया जाए तो अतिक्रमण की संख्या इससे कहीं अधिक ही होगी।
नगर परिषद भी पीछे नहीं रही- नदी के बहाव क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों, जनप्रतिनिधियों ने अतिक्रमण किया, लेकिन अतिक्रमण को रोकने व हटाने को लेकर जिन्हें पास जिम्मेदारी थी, वे भी अतिक्रमण कर पक्का निर्माण करवाने में पीछे नहीं रहे। जानकारी अनुसार तत्कालीन नगर परिषद प्रशासन ने नदी बहाव क्षेत्र में उद्यान का निर्माण करवाया। इसके बाद छतरियों का मोर्चा से रेलवे तीसरी फाटक की ओर बायपास का निर्माण करवाया। छतरियों का मोर्चा से रेलवे तीसरी फाटक मार्ग की ओर करीब एक किलोमीटर दूरी के हिस्से में अतिक्रमण कर पक्का निर्माण किया। जानकारी अनुसार परिषद के इस कार्य की आड़ में अन्य कई जनों ने अतिक्रमण कर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का निर्माण करवाया। इनसे इनके मालिकों को किराए के रूप में अच्छी खासी आमदनी हो रही है। सर्वे में चिह्नित अतिक्रमणों को हटाने को लेकर उपखंड प्रशासन, नगर परिषद प्रशासन व राजस्व विभाग के एक बार भी प्रभावी कार्रवाई नहीं करने पर लूनी नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण करने का काम आज भी जारी है। प्रभावशाली लोग कूड़ा करकट डाल व बाड़ बनाकर अतिक्रमण करते हंै। लंबे समय बाद तक प्रशासन के हटाने को लेकर कार्रवाई नहीं करने पर वे चारदीवारी बना पक्का निर्माण करते हैं।





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