Breaking News
recent

राजस्‍थान के इस पर्यावरण प्रेमी ने प्रदेशभर के शिक्षकोंं से सोशल मीडिया पर की अपील , वायरल हो रहा ये मैसेज

उमेश मेनारिया/ मेनार. पर्यावरण और पक्षी प्रेमी बूंदी के एक शिक्षक पृथ्वी सिंह राजावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक मार्मिक अपील की है । व्हाट्सप , फेसबुक एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक मैैसेज भेज कर गर्मी के दिनों में स्कूूलोंं के बन्द कमरों में मरने वाली गौरेया चिड़िया को बचाने की अपील की है । मैैसेज के माध्यम से प्रदेशभर के अपने अन्य शिक्षक मित्रोंं को संबोधित करते हुए लिखा कि‍ 10 मई से राज्य के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में ग्रीष्मावकाश शुरू होने वाले हैं। 9 मई को बाल सभा आयोजन, विद्यालय का परीक्षा परिणाम व अंतिम कार्यदिवस होने की भागदौड़ भरी व्यस्तता रहेगी। सारे काम समाप्त करने के बाद जब आप विद्यालय छोड़ने लगें तो अंतिम 5 मिनट में विद्यालय के सभी कक्षा-कक्षों का भली भांति अवलोकन अवश्य करें।

विद्यालय के कमरों की खिड़कियों और दरवाजों को बंद करने से पूर्व पूर्णतः आश्वस्त हो जाए कि कोई भी पक्षी या जीव अंदर न रहे। 40 दिन तक वो कमरे नहीं खुलेंगे और चिड़िया या अन्य पशु - पक्षी भीषण गर्मी में भूखे प्यासे तड़प तड़प कर बेमौत मारे जाएंगे। इन दिनों गौरया, कबूतर आदि पक्षियों के नेस्टिंग का भी वक्त है, और यदि आपको किसी कमरे में ऐसा कोई घोंसला या पक्षियों की गतिविधियां दिखे तो उस कमरे की कोई खिड़की को खुली छोड़ दे। बात छोटी सी है लेकिन किसी मूक प्राणी के लिए जिंदगी और मौत का प्रश्न है। ऐसे मामलों में यकीनन जिम्मेदारी व दोष किसका रहता है, कह नहीं सकते, परन्तु जब विद्यालय खुलेंगे, तब आपके विद्यालय में अगर ऐसी परिस्थितियां बनती है तो आप निःसंदेह विचलित हो जाएंगे। अधिक कक्षों व बहुमंजिला विद्यालयों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। सभी कक्षों में बिजली के स्विच भी ऑफ कर दें। विद्यालय में पानी की टंकियों में पर्याप्त पानी भरकर नल को बून्द बून्द टपकने के लिए छोड़ दे ताकि गर्मियों में मूक पशु पक्षी प्यास बुझा सके। यदि संभव हो तो कोई भी शिक्षक छुट्टियों के दौरान भी एक दो बार विद्यालय में आकर अवलोकन करने का श्रम करें। इस तरह का मैैसेज भेजते ही वायरल हो गया । कई लोगोंं ने इस तरह की जागरूकता की सराहना की ।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.