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खुद जीतकर बने विधायक, पांच माह बाद अपना ही बूथ हार गए नेताजी

बाड़मेर. करीब पांच महीने पहले अपने-अपने क्षेत्रों से जीतकर विधानसभा में पहुंचे विधायक लोकसभा चुनाव में अपने ही बूथ पर 'हार' गए। कांग्रेस विधायकों के खुद के बूथ पर भी पर्याप्त वोट नहीं मिलने से भाजपा से पिछड़ गए। जबकि लोकसभा क्षेत्र में कुल आठ विधायकों में से सात कांग्रेस और एक भाजपा के हैं।

विधानसभा चुनाव में बाड़मेर विधायक की जीत जिले में सबसे बड़ी थी। लेकिन उनके बूथ पर ही भाजपा को कांग्रेस से अधिक वोट मिले हैं। यहां भाजपा को 470 के मुकाबले कांग्रेस केवल 356 वोट ही ले पाई। कुछ इसी तरह चौहटन की रही। यहां पर भी विधायक पार्टी को वोट नहीं दिला पाए।

गुड़ामालानी में भी विधायक अपनी पार्टी को अपने ही बूथ पर नहीं जीता पाए। यहां भाजपा 476 वोटों के साथ मजबूत हुई। वहीं कांग्रेस को मात्र 155 वोट ही मिल सके।

यहां दिखाई मजबूती

शिव में विधायक के बूथ पर कांग्रेस को काफी मजबूती मिली। यहां भाजपा को केवल 75 वोट मिले। वहीं कांग्रेस ने यहां 667 वोट अर्जित किए। इस लिहाज से यहां पर कांग्रेस काफी आगे रही। इसी तरह का कुछ असर बायतु में दिखा। यहां भी विधायक के बूथ पर भाजपा के हिस्से 144 तो कांग्रेस को 191 वोट मिले। जैसलमेर विधानसभा में भी कांग्रेस विधायक का बूथ अपनी पार्टी के पक्ष में मजबूत दिखा। यहां कांग्रेस के 628 के मुकाबले भाजपा केवल 162 वोट ही ले पाई।

जिले के एकमात्र भाजपा विधायक

जिले में केवल सिवाना विधानसभा से विधायक भाजपा के हैं। जबकि लोकसभा क्षेत्र में आने वाले अन्य सात विधानसभा से सभी विधायक कांग्रेस से हैं। फिर भी कांग्रेस की भारी मतों से शिकस्त हुई। बाड़मेर में भाजपा संसदीय सीट रेकार्ड मतोंं से जीती है।

विधायक बूथ सं. भाजपा कांग्रेस
बाड़मेर : 151 470 356

शिव : 135 75 667
चौहटन : 285 300 205

गुड़ामालानी :112 476 155
सिवाना :

पचपदरा :
बायतु : 201 144 191

जैसलमेर : 276 162 628



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