नहर का ‘रॉ-वाटर’ पीने की मजबूरी
-गांव अरायांवाली बारानी का मामला,लंबे समस से क्षतिग्रस्त है जीएलआर
श्रीगंगानगर.भारत-पाक सीमा के सरहदी गांवों में बीएडीपी सहित अन्य योजनाओं में करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं लेकिन ग्रामीण स्वच्छ पानी तक से मरहूम रहते हैं। यही स्थिति अराइयांवाली गांव के ग्रामीणों की है।
गजसिंहपुर क्षेत्र से कुछ दूरी पर स्थित इस गांव के ग्रामीण डिग्गियों का रॉ वाटर पीते हैं। इस गांव में बनी तीन डिग्गियों में एफ नहर से पानी की आपूर्ति होती है। ग्रामीण यही पानी पेयजल के रूप में काम में लेते हैं। गांव के स्कूल में भी एक डिग्गी बनी हुई है। वहां पास के गांव से पानी की आपूर्ति होती है। गर्मी के मौसम में इस गांव में अक्सर ग्रामीणों को जलसंकट से जूझना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ पानी के लिए कई बार सांसद और विधायकों को अवगत करवाया गया लेकिन चुनाव के समय बड़े-बड़े वादों के बाद भूल गए।
लंबे समय से बंद पड़ा जीएलआर----
गांव में एक जीएलआर बना हुआ है। इस पर लाखों रुपए खर्च किए गए लेकिन यह अब काम नहीं आ रहा। जीएलआर की छत में बड़ा छेद है। इस जीएलआर पर पास ग्रामीण महिलाएं उपले सुखाती हैं।
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इनका कहना है
गांव में कुछ साल पहले जीएलआर बना था। इसमें पास के गांव से पानी की आपूर्ति होती थी लेकिन बीच में पाइप लाइन तोड़ दी गई। इस कारण जीएलआर में कई साल से आपूर्ति नहीं हो रही।
सतनाम राम, ग्रामीण।
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गांव में पानी की तीन डिग्गियां बनी हुई है। डिग्गियों में सीधा नहर से रॉ-वाटर ही आता है। इस गंदे व दूषित पानी को पीकर प्यास बुझानी पड़ती है। गंदे पानी से ग्रामीण अक्सर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
रामकिशन,ग्रामीण
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विधायक और सांसद के चुनाव के समय प्रत्याशी आते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं लेकिन वोट लेने के बाद वे इधर मुंह फेरकर नहीं देखतेद्ध गांव में पीने का पानी की गंभीर समस्या है।
रौणक सिंह, ग्रामीण
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एफ नहर से सीधे गांव की डिग्गी में सप्लाई होती है। यही पानी ग्रामीण पीते हैं। गांव में स्वच्छ पानी के लिए कई बार विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
रामाराम बावरी,पूर्व सरपंच।





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