गोविंदसिंह जैतावत
भीनमाल. कहने को तो सरकार महिलाओं को पूरा हक देने का दावा करती है, लेकिन जागरुकता के अभाव में जिलेभर के कई थानों में सीएलजी सदस्यों में महिलाओं की भागीदारी नहीं है। जहां पर भी है वहां पर महज एक-दो सदस्य ही है। ऐसे में थानों तक महिलाओं की समस्याएं नहीं पहुंच पाती है। जिले के 16 थानों में सीएलजी सदस्यों में 443 पुरूष सदस्य है, जबकि महज 22 महिलाएं ही सदस्य है। जिले के बागरा, झाब व सरवाना थाने है जहां पर एक भी महिला सीएलजी सदस्य नहीं है। इसके अलावा बागोड़ा, रामसीन, नोसरा, सायला, करड़ा, रानीवाड़ा, चितलवाना व सांचौर में महज एक-एक महिला ही सीएलजी सदस्य है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े थानों के सीएलजी सदस्यों में महिलाओं की भागीदारी नाम की है। ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता के अभाव में महिलाएं आज भी आगे नहीं आ पा रही है। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े थानों में सीएलजी में महिला की भागीदारी नहीं है। आधुनिकता के युग में भी हालात यह है कि महिलाएं आज भी थाने तक पहुंचने में कतराती है।
यह होती है सीएलजी समिति
प्रत्येक थाने में सीएलजी कमेटी बनी हुई है। यह कमेटी आमजन एवं पुलिस के बीच की कड़ी हैं जो समन्वय बनाए रखने का काम करती है। किसी भी मामले को लेकर पुलिस एवं आमजन में दूरियां बढ़े तो सीएलजी कमेटी सदस्य और पुलिस के बीच बैठक होती है।
भीनमाल में सबसे अधिक पांच
जिले में महिला थाना सहित 17 पुलिस थाने है। इसमें महिला थाने में 15 महिला सदस्य है। जिला पुलिस की वेबसाइट के अनुसार जिले के भीनमाल थाने में सबसे अधिक 5 महिला सीएलजी सदस्य है। इसके अलावा जालोर कोतवाल, भाद्राजून, आहोर में 2-2, बागोड़ा, रामसीन, नोसरा, सायला, करड़ा, रानीवाड़ा, चितलवाना व सांचौर में एक-एक महिला ही सीएलजी सदस्य है। बागरा, झाब व सरवाना थाने में एक भी महिला सीएलजी सदस्य नहीं है।
महिलाओं की भी हो भागीदारी
सीएलजी में पुरुष के बराबर महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए। महिलाओं को भी आगे आना चाहिए, महिला भी अपने अधिकारों की रक्षा कर सके। विभिन्न संगठनों के माध्यम से सीएलजी में महिलाओं को भागीदारी बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
अधिवक्ता हेमलता जैन, सामाजिक कार्यकर्ता व सीएलजी सदस्य





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