सीकर. शहर में लावारिस मिली असमी नाबालिग बालिका को लेकर बाल कल्याण समिति व पुलिस दोनों परेशानी में आ गई है। स्थिति यह है कि बरामद बालिका केवल अपनी स्थानीय भाषा जानती है। उसको मारवाड़ी और राजस्थानी सहित हिंदी भाषा भी पल्ले नहीं पड़ रही है।
एेसे उसकी पहचान उजागर नहीं होने तक बालिका को बालिका गृह में भिजवाया गया है। ताकि परिजनों का पता लगने पर उसको सुरक्षित हाथों में सौंपा जा सके। जानकारी के अनुसार सोमवार को मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोग अपने घरों को लौट रहे थे। इस दौरान मोहल्ला बिसातियान में रात करीब आठ बजे एक नाबालिग बालिका चौक में उदास बैठी मिली। जिसकी सूचना मोहल्ले वालों ने पुलिस को दी तो उन्होंने बालिका को दस्तयाब कर चाइल्ड लाइन के हवाले कर दी। इसके बाद बालिका को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। समिति सदस्य गिरवर सिंह झाझड़ ने बताया कि बालिका शक्ल सूरत से असम की लगती है। उसके पास एक बेग मिला जिसमें, नए और कुछ पुराने कपड़े रखे हुए थे।
पूछने पर बालिका कुछ नहीं बता रही है। क्योंकि उसको केवल अपनी भाषा आती है। राजस्थानी और हिंदी का ज्ञान भी नहीं होने पर उसको केवल इशारों की भाषा समझ आ रही है। थक हारकर समिति ने उसे सांवली रोड स्थित परमार्थ बालिका गृह भिजवाया है। परिजनों की तलाश की जा रही है।
खाना खोकर सो गई
बालिका को बरामद करने के बाद पुलिस ने उसको चाइल्ड लाइन के हवाले कर अपना पल्ला झाड़ लिया। समिति सदस्यों ने इशारों में बातकर बालिका को खाना खिलाया। इसके बाद वह गुमसुम होकर सो गई थी। उसके पास मोबाइल व पैसे भी नहीं मिले। दूभाषिय को बुलाकर पूछताछ करने पर उसका टूटा-फूटा पता मिला है। यहां संचालित होने वाली बाल कल्याण समिति से संपर्क कर उसके माता-पिता तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।





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