आबूरोड/ सिरोही। सियावा में हुई एक आदिवासी युवक की पत्थरों से कुचलकर हत्या के मामले शनिवार को मृतक पक्ष के अमीरगढ़ गांव से हथियारों से लैस आदिवासियों का हुजूम सियावा गांव में मौताणे की मांग को लेकर चढ़ोतरा करने पहुंचा। करीब एक दर्जन जीप व अन्य वाहन में सवार 200-250 आदिवासी तीर कमान, कुल्हाड़ी, धारियां, लाठी आदि हथियारों के साथ सियावा गांव में पहुंचे। सूचना मिलते ही रिको पुलिस व आरएसी का जाब्ता मौके पर पहुंचा और गांव छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस ने मृतक पक्ष से समझाइश की जिसके बाद करीब तीन घण्टे तक दोनों पक्षों में पंचायती चली व दोनों पक्षों में मौताणे की राशि को लेकर चर्चा चली। इस दौरान मौके पर थानाधिकारी चंपाराम, उपनिरीक्षक छगनलाल डांगी समेत पुलिस जाब्ता तैनात रहा। पुलिस ने मामले में चार घंटे के भीतर ही दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस का दावा है शीघ्र मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
उधर, अपर जिला एवं सेशन न्यायालय -२ ने तीन वर्ष पूर्व एक युवक का रास्ता रोककर कुल्हाड़ी से हत्या करने का प्रयास करने के मामले में दो अभियुक्तों को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए दो-दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
प्रकरण के अनुसार प्रार्थी वेहाफली जायदरा निवासी भीखाराम पुत्र थावराराम गरासिया ने १५ फरवरी २०१६ को जायदरा पुलिस को रिपोर्ट देकर बताया था कि उनके बहनोई उपलाखेजड़ा निवासी नोना पुत्र भाणाराम गरासिया खेत से उनके घर आ रहे थे, रास्ते में स्कूल के पास थलाफली जायदरा निवासी लालाराम पुत्र मंशाराम उर्फ मंछाराम गरासिया व पीथाराम पुत्र देवाराम गरासिया ने नोनाराम का रास्ता रोका व उसके साथ कुल्हाड़ी से मारपीट की। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर उन्होंने व भाई जोगाराम ने बचाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कुल्हाड़ी बरामद की। पूछताछ में आरोपितों ने पुरानी रंजीश के चलते हमला करने की बात कबूली। जिस पर पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ धारा ३४१, ३२३, ३०७/३४ भादसं में न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई।
बारह साक्ष्य परीक्षित करवाए
अपर जिला एवं सेशन न्यायालय -२ में सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल १२ साक्ष्य परीक्षित करवाए गए। अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र राजपुरोहित ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश -२ दलपतसिंह राजपुरोहित ने अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमत होते हुए दोनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध किया। दोनों अभियुक्तों को ७-७ वर्ष के कठोर कारावास व दो-दो हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।





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