अजमेर.
वन्य जीव और पर्यावरण संरक्षण का दावा करने वाला वन विभाग अपने ही संसाधनों को भुलाए बैठा है। घूघरा पौधशाला में पौधों को तेज धूप और गर्मी से बचाने के लिए निर्मित ग्रीन और पॉली हाउस सहित वायरलैस सिस्टम बदहाल है। विभाग चाहे तो इनका बेहतर उपयोग हो सकता है।
वन विभाग की घूघरा घाटी पर महर्षि दयानंद सरस्वती पौधशाला बनी है। इसमें बरसात, सर्दी और ग्रीष्म ऋतु के दौरान पौधे तैयार किए जाते हैं। राजस्थान वानिकी एवं विविधता परियोजना के तहत तत्कालीन वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री लक्ष्मी नारायण दवे ने वर्ष 2006 में उच्च तकनीकी पौधशाला का उद्घाटन किया था।
ताकि तैयार हों उन्नत पौधे
पर्यावरण में बदलाव, बढ़ती गर्मी और तापमान के चलते पेड़-पौधों पर असर पड़ रहा है। पौधों को झुलसाती धूप और गर्मी से बचाने के लिए पौधशाला में ग्रीन और पॉली हाउस बनाए गए। ताकि बेहतर वातावरण में उनकी हरियाली बरकरार रहे। विभाग ने शुरूआत में ग्रीन और पॉली हाउस का उपयोग किया। लेकिन धीरे-धीरे दोनों बदहाल होते चले गए।
यह है ग्रीन-पॉली हाउस की स्थिति
कई बार तेज हवाओं और ओलावृष्टि के चलते ग्रीन और पॉली हाउस के नेट फट गए हैं। इनमें ड्रिप सिंचाई की पद्धति भी बंद हो गई है। पिछले पांच-छह साल में तो इनका उपयोग भी नहीं हुआ है। उच्च तकनीकी पौधशाला में सिर्फ लोहे के सरिए नजर आते हैं। यहां झाडियां और खरपतवार उग चुकी हैं। विभाग ने इनकी मरम्मत कराकर पुन: इस्तेमाल करना मुनासिब नहीं समझा है।
वायरलैस सिस्टम बंद
विभाग ने इसी पौधशाला में 12 साल पूर्व वायरलैस सिस्टम भी स्थापित किया था। यहां एन्टीना और कुछ उपकरण लगाए गए। तेज अंधड़ और बरसात में वायरलैस सिस्टम का एन्टीना और उपकरण खराब हो गए। पिछले सात-आठ साल से यह सिस्टम भी ताले में बंद है।





No comments:
Post a Comment