मोहम्मद इलियास/उदयपुर. तस्करों से चंदन जब्तगी की कार्रवाई को लेकर पुलिस के खिलाफ दायर अवमानना के मामले को सिविल न्यायालय शहर उत्तर के पीठासीन अधिकारी रुपेन्द्र चौहान ने खारिज कर दिया। परिवादी न्यायालय में किस विपक्षी ने अवमानना का कृत्य किया, यह पेश ही नहीं कर पाए।
गफुरन बाई पत्नी अल्लाबक्ष सहित उसके परिवार के छह जनों ने तत्कालीन कलक्टर कुलदीप रांका, एसपी अनिल पालीवाल, डीवाईएसपी ब्रजेश सोनी, घंटाघर सीआई रतनलाल चांवला, धानमण्डी सीआई पर्वतसिंह, अम्बामाता सीआई भगवतसिंह हिंगड़ सहित 14 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का प्रार्थना पत्र पेश किया था। इसमें बताया कि कोर्ट ने 14 जनवरी 2008 को उनके विरुद्ध दायर अस्थायी निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने विपक्षियों को पाबंद किया था कि वे मूल वाद के निस्तारण तक विधि अनुसार किए जाने वाले वैध व्यवसाय में किसी प्रकार का कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं करें या करावें। इस आदेश के बावजूद विपक्षियों ने 9 जुलाई 2008 को उसके व्यावसायिक परिसर में धावा बोल दिया। परिसर में रखी वैध चंदन की लकड़ी जब्त कर ली। विरोध करने पर मुल्जिम बनाकर गिरफ्तार कर लिया। भारी मात्रा में माल जब्तगी के बाद भी कम बताया गया और फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया। परिवादी ने न्यायालय के आदेश की अवमानना के कृत्य के लिए विपक्षियों को संपत्ति कुर्क कर सिविल जेल भिजवाने व अर्थ दंड से दंडित करने का आदेश का निवेदन किया। न्यायालय ने सुनवाई के बाद वाद खारिज कर दिया।
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यह था मामला
बाद में बताया कि परिवादी अपनी रजिस्टर्ड फर्म के जरिये गत 45 वर्ष से चंदन की लकड़ी का क्रय-विक्रय का वैध व्यवसाय कर रहा है। समय-समय पर वन विभाग व पुलिस की ओर से सत्यापन किया जाता है। विपक्षी को रोकने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन वे अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर व्यवसाय को अवैध बनाने में लगे हैं। उसके खिलाफ पूर्व में कई फर्जी मुकदमें बनाए गए तथा व्यवसाय में अवरोध पैदा किया गया।
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सरकार की ओर से रखा पक्ष
सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता भूपेन्द्र जैन ने कहा कि राज्य सरकार व पुलिस विभाग प्रार्थी के विरुद्ध अवैध चंदन की लकड़ी को रखने व विक्रय करने की सूचना मिलती रही, उसके विरुद्ध विधिक रूप से कार्रवाई की जाती रही है और भविष्य में भी की जाती रहेगी। परिवादी खुलेआम चंदन चोरों व तस्करों से माल खरीदकर अवैध व्यवयाय करता रहा है।
- मैसर्स अल्ला बक्ष दाउद बक्ष की ओर से प्रोपराइटर अल्ला बक्ष ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था जिसकी विचारण के दौरान मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद रिकॉर्ड के लिए अल्लाबक्ष के विधिक वारिसान को फर्म के संबंध में कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। इन्होंने फर्म के प्रोपराइटर के बाबत कोई दस्तावेज पत्रावली में पेश नहीं किए। वर्तमान में जिसने विचारण में हिस्सा लिया है वह किस हैसियत से उपस्थित हो रहे है,यह दर्शित करने में विफल रहे।





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