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बीकानेर राज्य में कुओं के होते थे पट्टे

बीकानेर. पश्चिमी राजस्थान में बीकानेर राज्य वर्ष १९२७ में पूर्व महाराजा गंगा सिंह की ओर से बनाई गई गंगा नहर से पहले वर्षा के पानी पर निर्भर था। एक के बाद एक पड़े भीषण अकाल तथा वर्षा की कमी से बीकानेर राज्य की जनता कई बार यहां से पलायन कर गई। वर्ष 1880 से शुरू हुई बीकानेर राज्य की जनगणना की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 1881 तथा 1951 में हुई जनगणना में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक हो गई, क्योंकि अकाल के कारण पशुओं के साथ पुरुष अन्य स्थानों पर चले गए।

 

बीकानेर राज्य के शासकों ने समय-समय पर कई स्थानों पर तालाब, कुएं, बावड़ी, पोखर आदि के माध्यम से जल संरक्षण के प्रयास कि ए। अकाल राहत कार्यों के तहत भी कुओं व तालाबों का निर्माण करवाया गया। 29 सितम्बर, 1910 में पूर्व महाराजा गंगा सिंह ने एक लाख 46 हाजर 965 रुपए की लागत से बीकानेर में जल वितरण का पहला चरण शुरू किया और कहा कि इससे बीकानेर राज्य की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर होगा।

 

वर्ष 1931-32 में जेलवेल के पास इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल इंजीनियर की देखरेख में बोरिंग का कार्य शुरू किया गया और बाद में बोरिंग विभाग का अलग निर्माण किया गया। बोरिंग विशेषज्ञ डब्ल्यूसी बोरीश को 1500 रुपए प्रति माह वेतन पर बोरिंग इंजीनियर नियुक्त किया गया।

 

चारों दिशाओं से आता था पानी

सभी कुओं में से चौतीना कुआं से सर्वाधिक पानी आता था। इसे चौतीना कुआं इसलिए कहा जाता था, क्योंकि इसकी चारों दिशाओं से पानी आता था। इन कुओं से पानी को बड़े टैंक में पम्प करके शहर के अन्दर लेदर बेल्ट ऊंटों पर लगाकर सप्लाई किया जाता था। वर्ष 1944 में बीकानेर राज्य के लिए पूर्व राजा सादूल सिंह ने 'सादूल वाटर सप्लाई एन्ड रूरल रीकन्स्ट्रक्सन फंड 40 लाख रुपए से स्थापित किया। इनमें से 25 लाख रुपए राजधानी व श्रीगंगानगर में पीने के पानी का प्रबंध और गंदे पानी के निकास के लिए रखे गए। 15 लाख रुपए को पांच सालों में बांट दिया गया। इनसे गांवों के सुधार, पुन: निर्माण और उन्नति के लिए तथा 1 लाख रुपए आकस्मिक रूप से जरूरत पडऩे पर कुएं, तालाब और बंधे के लिए रखे गए। उस समय व्यक्ति विशेष के नाम से कुओं के पट्टे भी जारी किए जाते थे।

 

यहां से होता था जल वितरण
जेलवेल पर 1710 फीट तक खुदाई की गई। वर्ष 1807 में बीकानेर में जल वितरण आनन्द सागर (वर्तमान में नया कुआं),
पूर्ण बाई कुआं, मोहतों का कुआं, प्रतापमल कुआं, बेनिश्वर कुआं, बृजनाथ व्यास कुआं, रघुनाथ कुआं, सोनगिरी कुआ (सोनगिरी राजा जोरावर सिंह जी की
पत्नी के नाम से इस कुएं का निर्माण किया गया) और भईया कुआं से होता था।

 

करीब साढे़ तीस करोड़ गैलन कुएं का नाम पानी की क्षमता
(गैलन में)
चौतीना कुआं 11,36,97,050
नवल सागर 5,99,04,600
जेलवेल 5,42,50,200
करनीसर वेल 3,63,16,500
रतन सागर 4,15,62,200
योग 30,55,30,550



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