फैक्ट फाइल
- 72 घंटे में पानी की सप्लाई
- ८0 लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति ही मिल पा रहा पानी
- 100 लीटर प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति मिलना चाहिए पानी
- 40 लाख लीटर तक घट जाएगी सप्लाई
- ३० अपे्रल से नर्मदा परियोजना में क्लोज
जालोर. गर्मी का असर बढ़ा तो पानी की मांग भी बढ़ी, लेकिन इन हालातों के साथ साथ पानी की सप्लाई का शैड्यूल भी प्रभावित हो गया। 30 अपे्रल से प्रस्तावित क्लोजर से सप्लाई और भी प्रभावित होने वाली है। इधर, इन हालातों के बीच पानी की आपूर्ति में भी कमी आई तो लोगों ने अधिक से अधिक पानी के स्टॉक की ठान ली है। ऐसे में जैसे ही गली मोहल्लों में पानी की सप्लाई शुरू होती है सप्लाई लाइन पर लोग बूस्टर लगा देते हैं और दूसरे के हिस्से का पानी भी सोखने लग जाते हैं। ये हालात शहर के भीतरी भागों में अधिक है। जहां सप्लाई के दौरान हर घर में बूस्टर का उपयोग होता है। जिससे अंतिम छोर पर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता, लेकिन इसके बाद भी विभागीय स्तर पर अनदेखी बरती जा रही है।
बूस्टर नहीं पकड़े जा रहे
पेयजल सप्लाई के दौरान बूस्टर के प्रयोग से संबंधित क्षेत्रों में पानी की सप्लाई प्रभावित होती है। जल वितरण भी अनियमित हो जाता है। जो लोग बूस्टर लगाते हैं, उन्हें अधिक मात्रा में पानी मिलता है और जो लोग नहीं लगाते, उन्हें कम मात्रा में। हर साल गर्मी के दौरान विभागीय स्तर पर बूस्टर धरपकड़ अभियान चलाया जाता है। लेकिन इस बार अभी तक विभागीय स्तर पर कोई दल का गठन तक नहीं किया गया है। ऐसे में गली मोहल्लों में सप्लाई के दौरान धड़ल्ले से बूस्टर का प्रयोग होता है।
बिजली कटौती भी नहीं
2 साल पूर्व तक पेयजल सप्लाई के दौरान ज्यादा बिजली कटौती का शैड्यूल भी बना हुआ था। जिससे सप्लाई के दौरान बूस्टर का नहीं के बराबर प्रयोग होता था, लेकिन अभी डिस्कॉम और जलदाय विभाग के बीच तालमेल का अभाव भी नजर आ रहा है। यही कारण है कि सप्लाई के दौरान अधिकतर गली मोहल्लों में बिजली आपूर्ति शुरू रहती है और लोग बूस्टर लगाकर पानी खींचते हैं।
बढ़ सकते हैं सप्लाई के घंटे
नर्मदा परियोजना के लिए हालांकि 30 अपे्रल से 10 मई तक का क्लोजर लिया गया है। लेकिन तय समय पर काम पूरा नहीं किया गया तो क्लोजर बढ़ सकता है। जिसका सीधा असर सप्लाई पर पड़ेगा। शहर की सप्लाई पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगी। दूसरी तरफ लोगों को टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ेगा। गौरतलब है पूर्व में जितने भी क्लोजर नर्मदा परियोजना में लिए गए हैं, लगभग सभी में निर्धारित अवधि से अधिक दिन तक सप्लाई बंद रही है। जिसके कारण शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
ट्यूबवैल से सप्लाई की निर्भरता
नर्मदा परियोजना से लगभग 40 लाख लीटर तक पानी मुहैया होता है। इसके अलावा 25 लाख लीटर के लगभग पानी शहर की सप्लाई के लिए खुदे ट्यूबवैल से भी मिलता है। क्लोजर होने पर 40 लाख लीटर पानी की कमी आएगी और शहर की पूरी सप्लाई का बोझ 33 ट्यूबवैलों पर पड़ेगा। लगभग सभी ट्यूबवैल ग्रामीण क्षेत्रों में है। ऐसे में जैसे ही बिजली कटौती या फॉल्ट आएगा तो सप्लाई और भी प्रभावित रहने की संभावना बन जाएगी।
स्टॉक नहीं होने से दिक्कत
नर्मदा परियोजना के एफआर प्रोजेक्ट के लिए पानी का स्टॉक करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में क्लोजर के साथ ही सप्लाई बंद हो जाती है। दूसरी तरफ जालोर शहर के आस पास भी इस तरह का स्टॉक की कोई व्यवस्था नहीं है। सप्लाई जालोर पहुंचने के बाद नया बस स्टैंड के पास स्थित टैंकों से पंपिंग होती है।
इनका कहना
क्लोजर के दौरान नर्मदा परियोजना से सप्लाई नहीं मिल पाएगी। ऐसे में लोकल सोर्सेज पर ही निर्भर रहना होगा। क्लोजर के बाद फिर से सप्लाई बहाल हो जाएगी। सप्लाई के दौरान बूस्टर से पानी खींचने की स्थिति को रोकने के लिए भी संबंधित एईएन को निर्देशित किया गया है।
- ताराचंद कुलदीप, एसई, जलदाय विभाग, जालोर.





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